बहराइच। संपत्ति के लालच में भाभी की हत्या करने वाले दंपती को मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट नरेंद्र कुमार ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दंपती ने पांच साल पहले गड़ासे से वार कर भाभी को मौत के घाट उतारा था।
मालूम हो कि बौंडी थाना क्षेत्र अंतर्गत श्यामलाल की मौत मार्च 2010 में हुई थी। अंतिम संस्कार के बाद श्यामलाल की अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने के लिए उनके भाई जानकी यादव ले जा रहे थे तो श्यामलाल की पत्नी लल्ली ने देवर जानकी को रोक दिया था।
लल्ली का कहना था कि उनके भाई ही गंगा में अस्थि विसर्जन करेंगे। यह बात जानकी यादव को नागवार गुजरी थी। उन्हें लगा कि श्यामलाल की संपत्ति भाभी अपने मायके के लोगों को दे देंगी।
संपत्ति के लालच में जानकी और उसकी पत्नी सुनीता ने नौ मार्च 2010 की रात लल्ली की सोते समय गड़ासे से वारकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देकर सुबह पति-पत्नी फरार हो गए।
इस मामले में लल्ली के मायके के रामसनेही ने केस दर्ज कराया था। पुलिस ने फरार पति-पत्नी को 12 मार्च 2010 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
मामले में मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट नरेंद्र कुमार के न्यायालय पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संत प्रताप सिंह ने अपना-अपना पक्ष रखा।
बहस के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पति-पत्नी को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर दोनों को छह-छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। फैसले के बाद दंपती को जेल भेज दिया गया है।