बिछिया। मानव-तेंदुआ संघर्ष के बीच बहराइच में तेंदुओं की संख्या नियंत्रित करने के लिए बधियाकरण का विकल्प भविष्य में अपनाया जा सकता है। फिलहाल जिले में ऐसी कोई योजना शुरू नहीं हुई है, लेकिन बिजनौर में प्रोजेक्ट के सफल होने पर यहां भी इसे लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अभी बधियाकरण का प्रोजेक्ट बिजनौर के लिए तैयार होकर गया है। वहां इसका प्रयोग सफल रहता है तो बहराइच समेत अन्य क्षेत्रों में भी इसे लागू किए जाने पर विचार हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहराइच के लिए फिलहाल न तो कोई आदेश आया है और न ही इस संबंध में कोई प्रोजेक्ट मिला है।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार करीब 131 तेंदुए मौजूद हैं। वर्ष 2022 की बाघ गणना में कतर्नियाघाट में 59 बाघ दर्ज किए गए थे। मानव-तेंदुआ संघर्ष की लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच तेंदुओं की बढ़ती संख्या और उनके गांवों की ओर बढ़ते मूवमेंट को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। वन क्षेत्राधिकारी कतर्नियाघाट आशीष गौड़ ने कहा कि अभी ऐसे कोई आदेश नहीं मिला है, शासन का आदेश मिलने पर उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
50 फीसदी से अधिक न हो बधियाकरण
कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष बीडी लखमानी का कहना है कि कतर्नियाघाट में तेंदुओं की संख्या अधिक होने के कारण मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि बधियाकरण की योजना लागू होती है तो 50 प्रतिशत से अधिक तेंदुओं का बधियाकरण नहीं किया जाना चाहिए। अधिक संख्या में बधियाकरण किए जाने पर भविष्य में तेंदुओं की संख्या में कमी आने की आशंका हो सकती है। उन्होंने कहा कि तेंदुओं की संख्या नियंत्रित करने के साथ उनके प्राकृतिक आवास और भोजन की उपलब्धता पर भी ध्यान देना जरूरी है।