बिछिया (बहराइच)। तेंदुए से बिछड़कर तीन माह के उसके शावक ने दम तोड़ दिया। मादा शावक का शव शुक्रवार सुबह कतर्नियाघाट रेंज के जंगूटांड़ा गांव में नहर पुल के पास मिला।
वनाधिकारियों के अनुसार मां से बिछड़ने के बाद कई बार शावक ठंड की चपेट में आ जाते हैं, इस शावक की मौत इसी कारण हुई है।
तेंदुए के शव का तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया जिसमें निमोनिया से शावक की मौत की पुष्टि हुई है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज से तेंदुए का शावक मां से बिछड़कर रात में बहराइच-लखीमपुर की सीमा पर स्थित जंगूटांड़ा गांव के पास पहुंच गया।
सुबह गांव से कुछ दूरी पर नहर पुल के पास शावक का शव देखकर ग्रामीण सकते में आ गए। तत्काल रेंज कार्यालय को सूचना दी गई।
डीएफओ के निर्देश पर वन क्षेत्राधिकारी गयादीन टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मौका मुआयना कर शव को रेंज कार्यालय ले आए।
डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि जंगूटांड़ा गांव और जंगल के बीच लगभग डेढ़ किलोमीटर का फासला है। लगता है रात में शायद मादा तेंदुआ अपने शावकों के साथ शिकार पर निकली होगी। उसी समय शावक भटक गया।
उन्होंने बताया कि जहां शव बरामद हुआ है, वहां आसपास के खेतों में शावक के पदचिह्न भी मिले हैं। इससे लग रहा है कि शावक मां से बिछड़कर भटकता हुआ नहर के पास पहुंच गया और ठंड की चपेट में आ गया।
उन्होंने कहा कि शव पर कहीं चोटों के निशान नहीं हैं, जिससे हमले की कोई आशंका नहीं।
डीएफओ ने बताया कि मादा शावक की उम्र बमुश्किल तीन माह के आसपास है। ऐसे में शायद वह ठंड बर्दाश्त नहीं कर सका। उन्होंने कहा कि तीन डॉक्टरों का पैनल बनाया गया है।
इसमें सुजौली पशु चिकित्सा केंद्र के डॉ. अमर कटियार, मोतीपुर के डॉ. आरसी वर्मा व गायघाट के पशु चिकित्सक शामिल हैं। चिकित्सकों की टीम रात नौ बजे रेंज कार्यालय पहुंची।
तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम किया। डॉक्टरों ने बताया कि ठंड लगने से वह निमोनिया की चपेट में आ गया था। इसी कारण उसकी जान चली गई।