रुपईडीहा (बहराइच)। कस्बे के हनुमान मंदिर में आयोजित रामकथा के पांचवें दिन कथावाचक ने केवट व भगवान श्रीराम की कथा सुनाई। कथावाचक ने कहा कि केवट ने भगवान श्रीराम के पांव पखार कर उन्हें नदी पार कराई। इस दौरान पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा।
रुपईडीहा में स्थित हनुमान मंदिर परिसर में बस्ती कांवरिया संघ चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीराम कथा में भगवान श्रीराम व केवट के प्रसंग की कथा सुनाई गई। कथावाचक शिवबली चौबे ने कहा कि केवट ने श्रीराम प्रभु के अनुरोध पर उन्हें गंगा पार कराई। उन्होंने कहा कि श्रीराम केवट को आवाज देते हैं नाव किनारे ले आओ, पार जाना है।
उन्होंने सुनाया कि मांगी नाव न केवट आना, कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना। चरन कमल रज कहुं सबु कहई, मानुष करनि मूरि कछु अहई। कथावाचक ने कहा कि श्रीराम ने केवट से नाव मांगी, पर वह लाया नहीं। वह कहने लगा मैंने तुम्हारा मर्म जान लिया। तुम्हारे चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते हैं कि वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी है।
वह कहता है कि पहले पांव धुलवाओ, फिर नाव पर चढ़ाऊंगा। केवट प्रभु श्रीराम का अनन्य भक्त था। अयोध्या के राजकुमार केवट जैसे सामान्यजन का निहोरा कर रहे हैं। यह समाज की व्यवस्था की अद्भुत घटना है। केवट चाहता है कि वह अयोध्या के राजकुमार को छुए। उनका सान्निध्य प्राप्त करें। उनके साथ नाव में बैठकर अपना खोया हुआ सामाजिक अधिकार प्राप्त करें।
अपने संपूर्ण जीवन की मजूरी का फल पा जाए। राम वह सब करते हैं, जैसा केवट चाहता है। उसके श्रम को पूरा मान-सम्मान देते हैं। केवट रामराज्य का प्रथम नागरिक बन जाता है। इस मौके पर संयोजक डॉ. बैजनाथ कसौंधन, हनुमान मंदिर के महंत रामलखन दास महाराज, नंद किशोर साहू, संजय द्विवेदी, विनोद, नंद लाल, मुकेश कसौंधन, शिवकुमार, प्रेम बंसल, रामेश्वर अग्रवाल, घनश्याम वैश्य, सुलभ गुप्ता आदि मौजूद रहे।