बहराइच। कैसरगंज के सात वर्षीय मासूम से दुष्कर्म और नृशंस हत्या के बहुचर्चित मामले में महज 71 दिन के भीतर पीड़ित परिवार को न्याय मिल गया। गांव में घटना के बाद पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात कर मुकदमे को पॉक्सो कोर्ट में चलाने का आग्रह किया था। इसके बाद पॉक्सो न्यायालय में मामले की डे-टू-डे सुनवाई हुई और अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाकर पीड़ित पिता की न्याय की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचा दिया।
12 मई को कैसरगंज थाना के दशरथपुरवा गांव में विवाह समारोह के दौरान सात वर्षीय बालक लापता हो गया था। पुलिस विवेचना में सामने आया कि आरोपी मुकेश बच्चे को दूसरी शादी दिखाने के बहाने अपने साथ ले गया इसके बाद उसने दुष्कर्म कर गड़ासे से उसकी हत्या कर शव झाड़ियों में फेंक दिया।
घटना के बाद शव मिलने पर पूरे गांव में भारी आक्रोश फैल गया था। ग्रामीण आरोपी को मौके पर ही पीट-पीटकर मार देना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उसे भीड़ से बचाकर हिरासत में ले लिया। पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त गड़ासा और खून से सने कपड़े बरामद किए। विवेचना पूरी कर 20 जून को आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो संत प्रताप सिंह और संतोष सिंह ने बताया कि विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अरविंद कुमार गौतम ने 22 जून को आरोपपत्र का संज्ञान लिया। 24 जून से गवाहों के बयान शुरू हुए और 14 कार्य दिवस में अभियोजन पक्ष की गवाही पूरी कर ली गई। 22 जुलाई को आरोपी को दोषसिद्ध कर फैसला सुरक्षित रखा गया था। बृहस्पतिवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाया।
प्रशासन की पहल बनी मिसाल
घटना के बाद गांव में तनाव और जनाक्रोश को देखते हुए डीएम अक्षय त्रिपाठी और एसपी विश्वजीत श्रीवास्तव ने न्यायिक अधिकारियों से मुकदमे की त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया। फास्ट ट्रैक सुनवाई के कारण मामले का शीघ्र निस्तारण संभव हो सका और पीड़ित परिवार को कम समय में न्याय मिला।
ऐसे आगे बढ़ा मुकदमा
12 मई : मासूम से दुष्कर्म के बाद हत्या
20 जून : पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया
22 जून : पॉक्सो कोर्ट ने संज्ञान लिया
24 जून : डे-टू-डे सुनवाई शुरू
14 कार्य दिवस : गवाहों की गवाही पूरी
22 जुलाई : आरोपी दोषी करार, फैसला सुरक्षित
23 जुलाई : अदालत ने फैसला सुनाया