बहराइच। पीएफ घोटाले के विरोध में पावर कॉर्पोरेशन के जूनियर इंजीनियरों का धरना-प्रदर्शन शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान अवर अभियंताओं ने कार्य बहिष्कार कर घोटाले में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए 26 नवंबर से आंदोलन को तेज कर 28 नवंबर से पूर्ण रूप से हड़ताल पर जाने की घोषणा की।
राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के बैनर तले संगठन के अध्यक्ष संजय कुमार की अगुवाई में जनपद के अवर अभियंताओं का धरना-प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। धरने के दौरान सभी ने एक स्वर में पीएफ घोटाले के विरोध में सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जमकर नारेबाजी की।
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि विद्युत कर्मचारी अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को बचाने के लिए आंदोलित हैं। लेकिन सरकार इस मामले में कोई भी ठोस कार्रवाई करने से कतरा रही है। उन्होंने कहा कि इस घोटाले में सरकार की सुस्त कार्यशैली को लेकर अब कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता हा रहा है।
संगठन के सचिव नीरज पटेल ने कहा कि कर्मचारी अपनी मेहनत की गढ़ी कमाई की सुरक्षा को लेकर सिर्फ सरकार से लिखित गारंटी मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार के जिम्मेदार गारंटी लेने से हिचकिचा रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री की ओर से सीबीआई से जांच कराने की घोषणा भी ठंडे बस्ते में चली गई है। इससे सरकार में बैठे जिम्मेदार लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में आ रही है।
सरकार आंदोलनकारियों को सोचने पर विवश कर रही है कि इस घोटाले में सरकार आरोपियों को बचाने फिराक में हैं। धरने को एसडीओ इंजीनियर अजय कुशवाहा, इंजीनियर अवधेश पटेल, इंजीनियर विजय कुमार, जेई चंदन प्रजापति, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुशील गोस्वामी, मंडल अध्यक्ष नफीस अहमद आदि ने भी संबोधित किया।
धरने के दौरान सचिव ने बताया कि 26 नवंबर से विभाग के सभी संगठन सामूहिक रूप से धरना-प्रदर्शन करेंगे। जबकि 27 की शाम सभी कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताएंगे। इसके बाद भी सरकार नहीं चेती, तो सभी 28 से सामूहिक रूप से हड़ताल पर चले जाएंगे। इस दौरान अगर बिजली व्यवस्था में कोई भी व्यवधान उत्पन्न होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस मौके पर इंजीनियर अजय यादव, अवधेश पटेल, विजय कुमार, पंचम लाल, विजय तिवारी, अनिल भारती, जयनंदन मिश्रा, रवि बाल्मीकि, राजू खान आदि मौजूद रहे।