बहराइच। घंटी बजती है, पीटी पीरियड शुरू होता है, लेकिन बच्चों के कदम खेल मैदान की ओर नहीं, बल्कि बरामदे, प्रार्थना स्थल और कक्षाओं की ओर बढ़ जाते हैं। कहीं योग कराकर पीरियड पूरा कर दिया जाता है तो कहीं खाली जगह में कबड्डी और खो-खो का औपचारिक अभ्यास करा दिया जाता है। जिले के कई माध्यमिक विद्यालयों की पड़ताल में सामने आया कि खेल मैदान और खेल शिक्षकों के अभाव में खेल शिक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और खेलो इंडिया अभियान के बावजूद कई विद्यालयों में बच्चों को नियमित अभ्यास का अवसर नहीं मिल रहा। नतीजा यह है कि खेल प्रतिभाएं स्कूल स्तर पर ही दम तोड़ रही हैं।
750 छात्राएं, लेकिन मैदान नहीं के बराबर
शहर में स्थित आर्य कन्या इंटर कॉलेज, बहराइच में 750 से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन खेल मैदान नहीं के बराबर है। विद्यालय परिसर में दो खंभे लगे हैं, जिन पर सिर्फ वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के समय बैडमिंटन नेट बांधा जाता है। पूरे वर्ष नियमित अभ्यास नहीं हो पाता। प्रधानाचार्य किरण कुमार यादव ने बताया कि बच्चों को उपलब्ध खाली स्थान पर कबड्डी, खो-खो और लंबी कूद का अभ्यास कराया जाता है। खेल होने पर विद्यालय परिसर की सफाई कराकर सीमित जगह में गतिविधियां कराई जाती हैं।
637 छात्र, मैदान भी नहीं, खेल शिक्षक भी नहीं
राहत जनता इंटर कॉलेज, नानपारा में 637 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन विद्यालय के पास खेल मैदान नहीं है। बच्चों को विद्यालय परिसर में ही योग और सामान्य खेल गतिविधियां करानी पड़ती हैं। विद्यालय में नियमित खेल शिक्षक भी नहीं हैं। प्रधानाचार्य अरुण प्रकाश चौधरी ने बताया कि खेल शिक्षक का पद रिक्त है। फिलहाल शिक्षक काजी इरशाद को खेल गतिविधियों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जिससे नियमित प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है।
बच्चे बोले, मौका मिले तो दिखाएं हुनर
आर्यल्न्या की छात्रा रजनी और रेखा का कहना है कि उन्हें खेलों में रुचि है, लेकिन मैदान न होने से नियमित अभ्यास नहीं हो पाता। प्रतियोगिता से ठीक पहले तैयारी शुरू होती है, जिससे बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञ बोले, मैदान के बिना खेल शिक्षा अधूरी
खेल विशेषज्ञ सरदार सरजीत सिंह का कहना है कि खेल केवल किताबों या नियमों से नहीं सीखे जा सकते। फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स, कबड्डी और खो-खो जैसे खेलों के लिए पर्याप्त मैदान और प्रशिक्षित खेल शिक्षक दोनों जरूरी हैं। यदि विद्यालय स्तर पर यह व्यवस्था नहीं होगी तो राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना कठिन होगा।
ग्राउंड रिपोर्ट की प्रमुख बातें
-कई विद्यालयों में पीटी पीरियड केवल औपचारिकता बनकर रह गया।
-मैदान न होने पर बरामदे, प्रार्थना स्थल और कक्षाओं में कराई जा रही गतिविधियां।
-कई स्कूलों में खेल शिक्षक का पद खाली।
-वार्षिक प्रतियोगिताओं तक सीमित रह गईं खेल गतिविधियां।
-मैदान और प्रशिक्षक दोनों होंगे, तभी निखरेगी खेल प्रतिभा।