मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या बीते दो दिनों से अचानक बढ़ गई है। बाल रोग विभाग में आने वाले अधिकांश मरीज संक्रामक रोगों से पीड़ित मिल रहे हैं। इनकी स्वास्थ्य जांच कर चिकित्सक उनका इलाज कर रहे हैं। वहीं गंभीर स्थिति वाले मरीजों को भर्ती कर लिया जा रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक, मौसम में बदलाव से बच्चे तेजी से बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
तराई में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी है। दिन में तेज धूप व सुबह-शाम बादल छाए रहने से तापमान घट-बढ़ रहा है। ऐसे में संक्रामक बीमारियां लोगों को तेजी से अपनी चपेट में ले रही हैं। विशेषकर मासूम इसकी चपेट में जल्दी आ रहे हैं। बच्चों में बीमारियां बढ़ने का असर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में साफ दिखाई पढ़ रहा है। बाल रोग विभाग में प्रतिदिन पांच सौ से छह सौ बाल रोगी आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश मरीज खांसी, तेज बुखार व बुखार के साथ झटके आने की बीमारी से पीड़ित पाए जा रहे हैं।
चिकित्सकों द्वारा यहां आने वाले बच्चों की मलेरिया, टाईफाइड के साथ ही जेई व एईएस समेत अन्य जांचें कराते हुए उनका इलाज किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में तैनात प्रोफेसर डॉ. अरविंद शुक्ला ने बताया कि मौसम के उतार चढ़ाव के साथ ही मासूम रोग की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। यदि बच्चों में किसी भी प्रकार की बीमारी के लक्षण दिखाई पड़ें तो शीघ्र ही चिकित्सक से संपर्क करें।
संक्रामक रोगों के लक्षण-
1. तेज बुखार के साथ बेहोशी आना।
2. बुखार के साथ झटके आना।
3. पसली चलने के साथ खांसी आना।
4. उल्टी और दस्त।
बचाव के उपाय-
1. तेज बुखार आने पर शरीर को सादे पानी से पोंछे।
2. सर्दी, जुखाम, खांसी व दस्त होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
3. बच्चों को तेज धूप से सीधे कूलर या पंखे के सामने न आने दें।
4. साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
5- मच्छरदानी का प्रयोग करें।