बहराइच। शारीरिक और मानसिक रूप से लाचार ये व्यक्ति अपने घर या फिर किसी बिल्डिंग में नहीं बल्कि जिला अस्पताल के फर्श पर पड़ा है। यहां के स्टाफों ने इसके साथ कैसी बदसलूकी की है, इसका अंदाजा आप सहज ही ये तस्वीर देखकर लगा सकते हैं।
आइसोलेशन वार्ड के स्टाफ ने नाजिम को बिस्तर से उतारकर रैन बसेरे के फर्श पर लिटा दिया। खाना भी फर्श पर मिल रहा है। इलाज की व्यवस्था है न मरहम पट्टी की।
देहात कोतवाली के सिपाही राकेश कुमार ने 4 मार्च को घायलावस्था में लावारिस मिले एक व्यक्ति को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया।
यहां उपचार से हालत में सुधार हुआ तो उसने अपना नाम नाजिम अली (40) पुत्र मोहम्मद अली और पता लखनऊ के आलमबाग थाना क्षेत्र अंतर्गत मुस्लिमनगर बताया।
उसने बताया कि पैर से लाचार होने और मानसिक संतुलन बिगड़ने पर उनके परिवार ने उससे मुंह फेर लिया और घर से निकाल दिया। वह बता नहीं सके कि वे बहराइच कैसे पहुंचा।
डॉक्टरों के अनुसार नाजिम अली के दोनों पैरों में गैंग्रीन हो गया है। इसके चलते उसके पैर सड़ गए हैं। सड़न के कारण बदबू भी उठ रही है।
अभी तक उसे अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में बेड नंबर 12 पर भर्ती किया गया था लेकिन बदबू के कारण शनिवार को उसे बेड से उतारकर रैन बसेरे में फर्श पर लिटा दिया गया, जबकि रैन बसेरे में तीन बेड खाली थी।
अमर उजाला संवाददाता ने नाजिम की दुर्दशा देखी तो शासन की मुफ्त इलाज, के दावों की पोल खुल गई। समय पर मरहम पट्टी न होने के कारण उसके पैरों में कीड़े पड़ चुके हैं। लेकिन, राउंड पर आते-जाते समय डॉक्टरों की नजर इस पर नहीं पड़ती।
घर वालों ने मरने के लिए छोड़ दिया
नाजिम अली को जब कुरेदा गया तो उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान जरूर नजर आई लेकिन उसके पीछे का दर्द भी झलक आया। टूटी-फूटी जुबां से कहा कि परिवार में हर कोई है लेकिन अब बोझ बन चुका हूं। उन्हें रुपये चाहिए, मैं दे नहीं सकता। इसलिए मुझे मरने के लिए लावारिस छोड़ दिया।
इस लावारिस के साथ भी बरती जा रही संवेदनहीनता
मोतीपुर में लावारिस हालत में मिले एक वृद्ध (80) को 108 एंबुलेंस के ईएमटी मनोज पाठक ने 9 अप्रैल को जिला अस्पताल पहुंचाया था। वृद्ध के पैर भी सड़क हादसे में घायल होकर बुरी तरह सड़ चुके हैं। लेकिन न तो समय पर मरहम पट्टी हो रही है न उसका इलाज। अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदार उस पर दया कर पानी व खाने का इंतजाम कर देते हैं।
हंगामा कर रहे थे इसलिए किया शिफ्ट
दोनों वृद्धों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। बेहतर उपचार हो रहा था लेकिन दोनों ने हंगांमा काटा, जिससे अन्य मरीजों को परेशानी हुई। इस पर दोनों को रैन बसेरा वार्ड में भर्ती किया गया लेकिन वह खुद बेड पर नहीं लेट रहे मैं क्या करूं। दवा निरंतर की जा रही है। इंजेंक्शन भी लग रहे हैं लेकिन जिस स्थिति में दोनों रोगी हैं, उन्हे ठीक होने में समय लगेगा।
- ओपी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक