भारत-सीमा पर आवागमन करते ग्रामीण।
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भारत-नेपाल सीमा को अलग करने के लिए नोमेंस लैंड के किनारों पर पिलर स्थापित किये गये थे। लगभग दो साल के अंदर सीमा पर लगे 40 पिलर नदारद हो गए हैं। इनमें कुछ पिलर क्षतिग्रस्त होकर गिर गए थे।
जबकि कुछ पिलर नदी और बाढ़ में समाहित हो गए हैं। पिलर क्षतिग्रस्त होने की सूचना एसएसबी ने जिला प्रशासन के साथ ही भारत सरकार व गृह मंत्रालय को भेज दी है।
भारत-नेपाल सीमा श्रावस्ती जनपद के कलकलवा तटबंध से सटे हुए इलाके से लेकर लखीमपुर जनपद की सीमा तक स्थित है। भारत और नेपाल दोनों देशों की ओर से सीमा पर
चिह्नांकन के लिए पिलर स्थापित किये गये हैं। लगभग 100 से अधिक पिलर भारतीय सीमा क्षेत्र में नोमेंस लैंड के किनारे लगे हुए थे। वर्ष 2014 के अगस्त माह में नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण मिहींपुरवा और कतर्नियाघाट इलाके में लगे हुए पिलर काफी संख्या में बाढ़ में क्षतिग्रस्त होने के साथ टूट गए थे।
इसके अलावा श्रावस्ती जनपद के राप्ती नदी से सटे कलकलवा बांध से कुछ दूरी पर स्थित समतलिया आदि इलाकों के पिलर भी नदारद हो चुके हैं। इस मामले में एसएसबी के सातवीं वाहिनी के उप सेनानायक दिनेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि तो उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर स्थित लगभग 10-12 की संख्या में पिलर टूटकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जिनकी मरम्मत की जानी है।
इसके अलावा नदी और बाढ़ के कारण भी काफी संख्या में पिलर नदारद हो चुके हैं। इस संबंध में सूचना जिला प्रशासन के साथ भारत सरकार और गृह मंत्रालय को भेजी जा चुकी है।