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3200 स्थानों पर जलेगी होलिका

Fri, 10 Mar 2017 10:39 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
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रंग खरीदते लाोग - फोटो : अमर उजाला
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होली पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में है। इसे लेकर शहर, गांव व कस्बों के लोगों में उल्लास है। होलिका दहन स्थलों पर होलिका पताका लगी हुई हैं। इंतजार है होली पर्व का, जिसमें सिर्फ एक दिन शेष है। जिले के 3200 स्थानों पर होलिका दहन होगा। जबकि नगर क्षेत्र में 93 स्थानों पर होलिका दहन की परंपरा निभायी जाएगी। 
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होलिका का दहन इस बार 12 मार्च की रात को होगा। केंद्रीय होली समिति के अध्यक्ष दीपक सोनी दाऊ जी का कहना है कि जिले में 3200 स्थानों पर होलिका दहन की परंपरा निभाई जाती है। इनमें से 93 स्थान शहर क्षेत्र में हैं, जहां होलिका जलाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि नगर की छावनी, गल्लामंडी, सरयूनगर, अटकोनवा, हनुमान मंदिर, पीपल चौराहा, स्टीलगंज तालाब, लोहामंडी, मीराखेलपुरा, शिव मंदिर, छोटी संगत, गुदड़ी होली समिति, कटी चौराहा, नारायण नगर लोहिया, वशिष्ठ नगर, घसियारी टोला, लालेश्वरनाथ, नलकूप कॉलोनी समेत 55 होली समिति के द्वारा होलिका दहन का कार्यक्रम करवाया जाएगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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सभी जगह होली पताका लगाने की परंपरा भी पूरी हो गई है। होलिका दहन के मौके पर अराजक तत्व खुराफात न कर सकें, इसके लिए होली समितियों के पदाधिकारी सभी स्थानों पर नजर रखेंगे। उधर, कस्बे व ग्रामीण अंचलों में भी होलिका दहन परंपरात तरीके से किया जाएगा। एएसपी दिनेश त्रिपाठी का कहना है कि सभी स्थानों पर थानाध्यक्षों को नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। ग्राम चौकीदारों व हलका सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है।

शहर के घसियारीपुरा निवासी सेवानिवृत्त प्रवक्ता वीएस श्रीवास्तव का कहना है कि होलिका दहन दुर्गुणों का दहन है। व्यक्ति को अपने अंदर की बुराइयां त्यागने का संकल्प लेना चाहिए। पयागपुर निवासी जगतनारायण व कैसरगंज निवासी त्रिलोकीनाथ का कहना है कि होली शांति, सौहार्र्द और भाईचारे का त्योहार है। होलिका दहन करके यह संदेश दिया जाता है कि असत्य पर सत्य की विजय होगी। ऐसे में अपने मन की बुराइयों पर भी व्यक्ति को विजय प्राप्त करने के लिए संकल्पित होना चाहिए।

पयागपुर के इमलियागंज निवासी पंडित इंदुभूषण मिश्र का कहना है कि पूर्णमासी काल में ही होलिका दहन की परंपरा है। रविवार को सायं 7:26 बजे तक ही पूर्णमासी का योग है। 7 से 7:26 बजे के मध्य का समय होलिका दहन के लिए उपयुक्त रहेगा। इस समय में होलिका दहन किया जा सकता है। इसके बाद प्रथमा तिथि की शुरुआत हो जाएगी। जबकि होली खेलने का समय सोमवार को सुबह सात बजे से दोपहर 12:30 बजे तक है।
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