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700 ग्राम पंचायतों में बिना आदेश लगा दी कोरोना जागरुकता की होर्डिंग्स

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बहराइच। आपदा को कैसे अवसर में बदलना है। यह कहावत वैसे तो कुछ अच्छे कामों के लिए होती। लेकिन जिले में कुछ और ही कारनामा इस कहावत को चरितार्थ कर गया। दरअसल हुआ यूं कि कोरोना महामारी में ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर कोरोना से बचाव के लिए होर्डिंग्स लगा दी गईं। यहां तक कि एक दो नहीं पूरी 700 ग्राम पंचायतों में यह कार्य किया गया।
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लॉकडाउन खत्म होने के बाद बिल भी 67.76 लाख का हर ग्राम पंचायत को भेज दिया गया। बिल के आते ही जब खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि प्रशासन या शासन के स्तर से ऐसा कोई फरमान दिया ही नहीं गया था। अधिकारियों के हाथ पांव फूलने पर जांच बिठा दी गई। सामने आया कि एक निजी कंपनी के ठेकेदार ने बिना किसी आदेश के यह कारनामा कर डाला। अब शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
कोविड-19 की शुरुआत भारत में सक्रिय तौर पर मार्च में दिखाई दी। लोगों को और खासकर ग्रामीण अंचल में रहने वाले लोगों को इस महामारी के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी। ऐसे में जिले की एक निजी आउटडोर मीडिया एडवरटाइजिंग कंपनी ने ग्राम पंचायत स्तर पर एक-एक होर्डिंग लगा दी। इस होर्डिंग का साइज 96 स्वायर फीट था और एक होर्डिंग की औसतन कीमत 1500 रुपए थी। लॉकडाउन खत्म होते ही कंपनी ने हर ग्राम पंचायत के नाम पर बिल काटकर ग्राम पंचायत को भेज दिया। 700 ग्राम पंचायतों को जो बिल भेजा गया। उसकी प्रति होर्डिंग कीमत 9680 रुपये लगाकर 67.76 लाख का कुल बिल ग्राम पंचायत को भेज दिया गया।
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पहले से ऐसी कोई जानकारी न होने पर ग्राम पंचायत स्तर से प्रशासन को सूचित किया गया। लेकिन यहां से ऐसा कोई भी आदेश न देने की बात कही गई। इसके बाद जिलाधिकारी शंभु कुमार ने सीवीओ डॉ. बलवंत सिंह को मामले की जांच सौंपी। सीवीओ ने जांच करने के बाद रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। जांच में प्रशासनिक स्तर पर होर्डिंग लगानेे का कोई आदेश जारी न होने का हवाला देते हुए भुगतान के लिए प्रस्तुत बिल को फर्जी बताया गया है। डीएम ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
बांस बल्ली पर टांग दी होर्डिंग
शासन की ओर से जागरूकता अभियान के दौरान किसी भी तरह की होर्डिंग लगाए जाने के दौरान लोहे के एंगल व फ्रेम का ही उपयोग किए जाने का मानक निर्धारित कर रखा गया है। इसके बावजूद बांस और बल्ली के सहारे ठेकेदार ने होर्डिंग को टांगकर किनारा कस लिया।
जांच कर भेजी गई रिपोर्ट
जिले की ग्राम पंचायतों में होर्डिंग लगाने का काम किया गया है। किसके आदेश पर काम हुआ और भुगतान कैसे होगा। इसका कहीं कोई शासनादेश ही नहीं था। डीएम की ओर से जांच कराई गई है। जिसके बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
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अरविंद चौहान, सीडीओ, बहराइच
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