हेपेटाइटिस बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग महज 8 फीसदी बच्चों को टीकाकरण का रक्षा कवच दे पाया है। ऐसे में सावधान रहने की आवश्यकता है। कारण बरसात का मौसम में इस खतरनाक बीमारी से संक्रमित होेने की संभावना दोगुना हो जाती है।
ये हम नहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े कह रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हेपेटाइटिस के टीके उपलब्ध होने के बावजूद हर साल दो लाख से ज्यादा लोग हेपेटाइटिस की वजह से मरते हैं। तराई में बारिश के चलते बाढ़ व जगह-जगह जलभराव की स्थिति है। जिससे जलजनित कई बीमारियों के होने की आशंका बढ़ गई है। हेपेटाइटिस इनके प्रमुख है।
वायरस जनित इस रोग से सबसे अधिक लीवर को नुकसान पहुंचता है। समय पर उपचार न मिलने के कारण यह रोग हेपेटाइटिस लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर में तब्दील हो जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे बहुत ही घातक रोग माना है।
हेपेटाइटिस को पांच श्रेणियों में बांटा गया है, ए, बी, सी, डी और ई। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ पारितोष मिश्रा कहते हैं कि जिले में इसके सभी रुप मिलते हैं। हेपेटाइटिस ए और ई का संक्रमण दूषित खानपान से होता है। बी और सी का संक्रमण रक्त के जरिए होता है। वहीं हेपेटाइटिस डी, बी के साथ मिलता है।
उल्टी, बुखार और पीलिया होना हेपेटाइटिस का प्रमुख लक्षण हैै। हेपेटाइटिस ए और ई के लक्षण 15 से 13 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू होते हैं। हेपेटाइटिस बी में जी मिचलाना, भूख कम लगना, पेट के ऊपरी दाहिने भाग में दर्द होना, पेशाब का गाढ़ा पीले रंग का होना, कुछ रोगियों के मल का रंग पीला होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
डॉ. पारितोष मिश्रा कहते हैं कि हेपेटाइटिस के स्तर से ही उपचार तय होता है। हेपेटाइटिस ए और बी में बुखार के लिए अलग से दवा दी जाती है और पेट में दर्द के निवारण के लिए अलग से। जो रोगी क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से ग्रस्त होते हैं, उनका इलाज एंटी वायरल दवाओं से किया जाता है।
हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी के कारण होने वाली लीवर की बीमारी की गंभीर अवस्था में लीवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र कारगर विकल्प होता है। हेपेटाइटिस डी का इलाज अल्फा इंटरफेरंस के इंजेक्शन से किया जाता है।
शून्य से एक वर्ष आयु के 99 हजार 532 बच्चों को हेपेटाइटिस का टीकाकरण किए जाने का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन चार माह में सिर्फ 8 हजार 756 बच्चों का टीकाकरण हुआ है, जो महज 8.79 फीसदी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ डीआर सिंह ने बताया कि बच्चों का नियमित टीकाकरण चल रहा है। वहीं ऐसे रोगियों के बेहतर उपचार के लिए कुशल चिकित्सक हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में जांच व इलाज की व्यवस्था है।