बहराइच। तराई में मौसम पल-पल बदल रहा है। गुरुवार को जिले में हुई बूंदाबांदी के बाद देर रात जंगल से सटे इलाकों में झमाझम बरसात शुरू हो गई। नवाबगंज इलाके में भी बारिश हुई। इस दौरान जंगली इलाकों में बारिश के साथ ओले भी गिरे, जिससे गेहूं के साथ ही दलहनी और तिलहनी फसलों को नुकसान हुआ है। उधर, शहर में भी दोपहर बाद तेज हवाएं चलीं, जिससे गलन बढ़ गई और लोग पूरे दिन ठिठुरते रहे। बारिश और ओले गिरने से ठंड में इजाफा हो गया है।
तराई का मौसम लगातार बदल रहा है। गुरुवार को दिन में बूंदाबांदी का दौर शुरू हुआ था। इसके बाद देर रात मिहींपुरवा सेे सटे कतर्नियाघाट के जंगली इलाकों में बरसात शुरू हो गई। झमाझम बारिश के कारण खेतों में गेहूं की फसल पूरी तरह डूब गई है। बारिश के दौरान इलाके के पिपरा, भगड़िया, चुरवा, करमोहना, सोंगवा, गंगापुर आदि गांवों में ओले भी गिरे। ओले गिरने के कारण गेहूं व सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही तिलहनी फसलों और मसूर, मटर, चना, तोरिया, गोभी, सरसों आदि की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
तेज बारिश और ओले गिरने से गलन बढ़ गई, जिससे मिहींपुरवा इलाके के गंगापुर, मधवापुर, सुजौली, चफरिया, सर्राकला, मिहींपुरवा सहित पूरे तहसील क्षेत्र में लोग ठिठुरते रहे। उधर, नवाबगंज क्षेत्र के बरवलिया, चरदा, रामनगर, सुमेरपुर, सुजौली, बनकुरी आदि इलाकों में भी तेज बरसात हुई। यहां भी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। चौक-चौराहों पर जगह-जगह लोग अलाव के निकट बैठ कर ठंड से बचने का प्रयास करते रहे।
बारिश होने के कारण नेपाल सीमा से सटे इलाकों में ठंड बढ़ गई है। तहसील प्रशासन की ओर से अभी तक ठंड से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में आक्रोश भी है। उधर, शहर में दोपहर तक तेज धूप खिली रही, लेकिन दोपहर बाद अचानक मौसम बदल गया। तेज हवाएं चलनी शुरू हो गईं। आसमान में बादल छा गए। तेज हवाएं चलने के कारण घर से निकले लोगों को ठिठुरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
आलू की फसल हो सकती चौैपट
बहराइच जनपद में करीब 2200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बोआई की गई है। जिला उद्यान अधिकारी की ओर से अभी किसानों के लिए एडवाइजरी जारी ही की गई थी कि इसी बीच जंगल से सटे इलाकों में तेज बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। तेज बारिश होने के कारण आलू की फसल को सबसे अधिक नुकसान होने की संभावना है। पिछेती आलू की बोआई करने वाले किसानों के बीज खेतों में ही सड़ने की संभावना है।
गेहूं के लिए बेहतर है बारिश
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि कुछ इलाकों में बारिश हुई है। बारिश होने के कारण सरसों की फसल के साथ ही दलहनी फसल को थोड़ा नुकसान होने की आशंका है। तोरिया की फसल को काफी नुकसान होगा। मगर 20 से 25 दिन पहले गेहूं की फसल की बोआई करने वाले किसानों को सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इनके लिए बारिश फायदेमंद होगी।
सर्वे के बाद दिया जाएगा मुआवजा
मोतीपुर तहसील क्षेत्र में गुरुवार की रात से लेकर शुक्रवार की सुबह तक तेज बारिश हुई है। कुछ स्थानों पर बारिश के साथ ही ओले गिरने की भी सूचना मिली है। कुछ फसलों को नुकसान हुआ है। राजस्व लेखपालों को सर्वे किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के बाद मुआवजा देने की कार्रवाई की जाएगी।
- ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी, उपजिलाधिकारी मोतीपुर