तराई बदमाशों के लिए अपराध का गढ़ रहा है। यह जिला आतंकियों से लेकर माफिया
तक के लिए शरणगाह रहा है। इसके बावजूद एनसीआरबी की ओर से जारी आंकड़ों ने
लोगों को राहत देने का काम किया है। जिले में तीन दशक पूर्व हत्याओं का
ग्राफ तेजी से उठा था। हालांकि इसके बाद उतार-चढ़ाव के साथ इसमें कमी दर्ज
हुई।
जिसने समाज के अंदर सामुदायिकता की भावना और बदलती सोच को मजबूत करने
की तस्वीर पेश की है। बहराइच जनपद का अपराध जगत से काफी पुराना नाता
रहा है। यहां पर अपराधों की फेहरिस्त हमेशा लंबी रही है। तीन दशक पूर्व
यहां पर हत्याओं का ग्राफ काफी ऊंचा रहा है।
यहां पर वर्ष 1975 के दौरान 70
से अधिक हत्याओं की वारदात हुई। जबकि वर्ष 1980 में यह संख्या 80 के
आंकड़े को पार कर गई। हालांकि समाज में बढ़ती शिक्षा और लोगों के बीच आपसी
सौहार्द्र की भावना के बाद जिले में काफी राहत महसूस हुई। इक्कीसवीं सदी
में संचार तकनीक के बढ़ते प्रयोग के बाद हालात काफी सामान्य हुए हैं।
यहां
पर वर्ष 2007 से वर्ष 2010 के बीच हत्याओं के ग्राफ में उतार-चढ़ाव दर्ज
किया गया है। इसके अलावा हत्याओं में गिरावट भी दर्ज हुई है। वर्ष 2011 से
वर्ष 2013 तक हत्याओं का ग्राफ कम हुआ है। माना जा रहा है कि इसके पीछे
शिक्षा की बढ़ती दर भी काफी सहायक साबित हुई है।