हम भारत की नई किरण हैं हम दिन के आलोक नवल, हम नवीन भारत के सैनिक धीर वीर गंभीर अचल...। रामधारी सिंह दिनकर की ये पंक्तियां 21 वर्षीय शिवांतिका त्रिपाठी पर सटीक बैठती है। एक माह पहले तक उसे राजनीति का ककहरा तक मालूम नहीं था, लेकिन पंचायत चुनाव में जब वह उतरी तो धनबली व बाहुबली चारों खाने चित हो गए। जब परिणाम आए तो शिवांतिका गांव की सरकार की अगुवा बन गई। साथ ही बहराइच की सबसे कम उम्र की महिला प्रधान बनने का गौरव भी हासिल हुआ। रविवार को ब्लॉक परिसर में जब उसने प्रधान पद की शपथ ली तो उसकी आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। बेटी के चेहरे पर खुशी के भाव देखकर माता पिता भी अभिभूत हो उठे हैं। ग्रेजुएट शिवांतिका के हौसले को प्रशासन ने भी सलाम किया, लेकिन उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उसे निरक्षर घोषित किया हैै। आयोग की इस चूक पर प्रधान शिवांतिका आहत हैं।
वर्ष 1994 में नवाबगंज ब्लॉक के शिवपुर सेमरा गांव में सतीश त्रिपाठी के घर जन्मी शिवांतिका की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक पाठशाला में हुई। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय से हाईस्कूल, नानपारा के सेंट पीटर इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट और वर्ष 2014 में रुपईडीहा स्थित लार्ड बुद्धा डिग्री कॉलेज से स्नातक पास किया। शिवांतिका ने कभी भी चुनाव लड़ने के बारे में सोचा तक नहीं था। लेकिन गांव की बदहाल गलियां, जर्जर मार्ग, पेयजल की समस्या, गरीबी व शिक्षा का बदहाल स्तर उन्हें कचोटता था। आखिरकर गांव की सूरत को बदलने के लिए शिवांतिका ने पंचायत चुनाव में उतरने की ठान ली। एक दिन जब परिवारीजन एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे, तभी शिवांतिका ने पिता सतीश के सामने अपनी इच्छा जाहिर कर दी।
बेटी की इस सोच व जज्बे को भांपकर परिवारवालों ने उसे चुनाव में उतारने की ठान ली। गांव में प्रधान पद के लिए शिवांतिका को लेकर दस और प्रत्याशी मैदान में थे, मुकाबला बेहद कड़ा था। विपक्षी वोटरों को लुभाने के लिए हर चाल चल रहे थे लेकिन शिवांतिका ने सड़क, शिक्षा, बेरोजगारी व महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ा। चूंकि मन में एक नई सोच व गांव को तरक्की की ओर बढ़ाना था तो सफलता तय थी। जनता ने दबे पांव मतदान स्थल पहुंचकर शिवांतिका के पक्ष में हवा बना दी और जब परिणाम आए तो राजनीतिक सूरमा भौंचक रह गए।