बहराइच। प्रदेश में कन्या भ्रूण हत्या को समाप्त करने, समान लैंगिक अनुपात स्थापित करने, बाल विवाह की कुप्रथा को रोकने, बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा को प्रोत्साहन देने, बालिकाओं को स्वावलंबी बनाने में सहायता प्रदान करने तथा बालिका के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना संचालित की जा रही है।
धनतेरस के अवसर पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा कन्या सुमंगला योजना का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम के सजीव प्रसारण के लिए राजकीय बालिका इंटर कालेज में कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि सांसद अक्षयवर लाल गोंड ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया।
नारी शिक्षा निकेतन की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना व स्वागत गीत तथा आर्य कन्या बालिका इंटर कालेज की छात्राओं द्वारा बेटी बचाओ पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि सांसद अक्षयवर लाल ने सदर विधायक अनुपमा जायसवाल, नानपारा की माधुरी वर्मा, विधायक प्रतिनिधि निशंक त्रिपाठी, जिलाधिकारी शंभु कुमार, पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद चौहान व अन्य लोगों के साथ चयनित 31 लाभार्थियों को योजना के तहत प्रदान की जाने वाली धनराशि के प्रतीक चेक का वितरण किया।
सांसद ने जिले के अधिकारियों, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी से योजना को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। सदर विधायक अनुपमा जायसवाल ने कहा कि नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में कन्या सुमंगला योजना मील का पत्थर साबित होगी।
विधायक नानपारा माधुरी वर्मा ने कहा कि बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा को प्रोत्साहन देने तथा उन्हें स्वावलंबी बनाये जाने के लिए यह एक महत्वाकांक्षी योजना है। विधायक प्रतिनिधि निशंक त्रिपाठी ने कहा कि सामाजिक व्यवस्था से अनछुए व्यक्तियों के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा अनेकों कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है, यह योजना भी उसी दिशा में किया गया एक सार्थक प्रयास है।
कार्यक्रम के अंत में जिला प्रोबेशन अधिकारी वीपी वर्मा ने योजना की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन जनता राहत इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डॉ. दीन बंधु शुक्ला ने किया। ब्लाक मुख्यालयों पर भी टीवी के माध्यम से सजीव प्रसारण कर प्रचार साहित्य का वितरण किया गया।