फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घाघरा की कटान में समाए 15 मकान

Thu, 01 Sep 2016 12:57 AM IST
बहराइच/अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
महसी के कहारनपुरवा में कटान कर रही घाघरा नदी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
घाघरा नदी के जलस्तर में निरंतर गिरावट दर्ज हो रही है। इसके साथ ही कटान और तेज हो गई है। महसी तहसील का कहारन पुरवा गांव निशाने पर आ गया है। रात से अब तक 15 मकान घाघरा की लहरों में समा गए। जबकि 135 बीघे उपजाऊ जमीन भी लहरों की भेंट चढ़ गई।
विज्ञापन


लोगों में हड़कंप की स्थिति है। घाघरा खतरे के निशान से 21 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। ग्रामीणों ने आशियाने उजाड़कर पलायन शुरू कर दिया है। राहत और बचाव का कार्य पूरी तरह नाकाफी    दिख रहा है। 

घाघरा नदी का जल स्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। जिससे बाढ़ की समस्या से तो लोगों को राहत मिली है। लेकिन जलस्तर मेें कमी से कटान तेज हो गई है। घाघरा की लहरें सबसे ज्यादा महसी तहसील क्षेत्र के कहारनपुरवा गांव में तबाही मचा रही हैं। गांव का अस्तित्व संकट में है।
विज्ञापन


इस गांव में 82 मकान से एक एक कर ग्रामीणों के आशियाने नदी में समाहित हो रहे हैं। रात से अब तक कहारनपुरवा गांव निवासी संगम, भरोसे, विजयकुमार, चंद्र शेखर, अवनीश, छबीले, मनमोहन, उषा सिंह, ननके, शिव नरायन, सुरेश, राधेश्याम समेत 15 ग्रामीणों के मकान नदी की लहरों के भेंट चढ़ गए।

वहीं गांव निवासी मदनलाल, चंद्रशेखर, केशव, अमिरका, पूरन, लवकुश, रामकली, गंगाराम, अर्जुन, जमुनाप्रसाद, मनमोहन, रामछबीले, हेमराज, तारा देवी, विजय कुमार, जीवनलाल, जनकलाल आदिकी लगभग 135 बीघे खेती योग्य जमीन भी कटान की भेंट चढ़ गई है।

ग्रामीणों ने कटान की स्थिति से तहसील प्रशासन को अवगत तो करा दिया है। लेकिन अब तक कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। प्रभावित ग्रामीणों ने आशियाने उजाड़कर पलायन करना शुरू कर दिया है। लोग बेहाल हैं। 

ग्राम प्रधान ओकार सिंह ने बताया कि हड़ताल के चलते क्षेत्र के लेखपाल मधुकर त्रिपाठी और विनोद कुमार भी ड्यूटी पर नहीं हैं। ऐसे में जिन ग्रामीणों की खेती योग्य जमीन और मकान कट रहा है उनकी सूची भी नहीं बन पा रही है। ऐसे में मुआवजा भी कटान पीड़ितों को नहीं मिल पा रहा है। 

मससी के उपजिलाधिकारी‌‌ एसपी शुक्ला ने बताया कि घाघरा नदी कटान कर रही है। लेकिन जिन लोगों के मकान और खेत कट रहे हैं। उन्हें मुआवजा भी दिया जा रहा है। अब तक सात लाख से अधिक की धनराशि वितरित की गई है। क्षेत्रीय लेखपाल हड़ताल पर जरूर हैं। लेकिन कटान प्रभावित इलाकों में सूची तैयार करवाने की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। सभी पीड़ितों को मुआयजा दिया जाएगा।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें