गिरिजापुरी व बनबसा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद घाघरा नदी की कटान तेज हो गई है। शुक्रवार को महसी के तीन गांवों में पांच ग्रामीणों के मकान कटान की भेंट चढ़ गए, जबकि 50 बीघा खेती योग्य भूमि भी नदी में समाहित हो गई है।
घाघरा ने अब प्राथमिक विद्यालय कायमपुर व राजा दलजीत सिंह के ऐतिहासिक किले को निशाने पर ले लिया है। कटान बढ़ने के कारण ग्रामीणों में दहशत है। वहीं, राजस्वकर्मियों ने गांव में नदी की कटान का जायजा लिया है लेकिन अभी तक बचाव के कार्य शुरू नहीं किए गए हैं। उधर, शनिवार को भी बैराज की ओर से लगभग साढ़े चार लाख क्यूसेक पानी घाघरा नदी में छोड़ दिया गया है। बाढ़ की संभावना को देखते हुए एसडीएम महसी ने क्षेत्र का दौरा कर ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
नेपाल में भारी बरसात होने के कारण शुक्रवार सुबह गिरिजापुरी और बनबसा बैराज से 2.86 लाख क्यूसेक पानी घाघरा नदी में छोड़ा गया था। इसके बाद शनिवार को गिरिजापुरी बैराज की ओर से एक लाख 70 हजार, शारदा बैराज की ओर से 30 हजार और बनबसा बैराज की ओर से दो लाख 44 हजार क्यूसेक पानी घाघरा नदी में छोड़ दिया गया है। इसकी पुष्टि सरयू नहर के अवर अभियंता पीके सिंह ने की है।
नेपाल की ओर से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। महसी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कायमपुर, जरमापुर व गोलागंज गांव के दयाराम, रामदीन, अमेरिका, रंगीलाल और चेतराम के मकान नदी में समाहित हो गए हैं। कायमपुर गांव निवासी रामानंद, भगौती, राजेश, मालती, सांवली, हरिप्रसाद, नौरंगीलाल, नरेश समेत कई ग्रामीणों का कुल 50 बीघा खेत कटान की भेंट चढ़ गया।
तहसीलदार देवेश चंद्र गुप्ता ने कटान का जायजा लेने के लिए कानूनगो संतोष कुमार श्रीवास्तव को मौके पर भेजा है। उधर, महसी के एसडीएम चंद्रपाल ने शनिवार को क्षेत्र के पचदेवरी गांव का दौरा किया है। उन्होंने ग्रामीणों को कटान के चलते सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।