मिहींपुरवा में स्थित भरतपुर गांव।
- फोटो : मिहींपुरवा में स्थित भरतपुर गांव।
मिहींपुरवा। कौड़ियाला नदी में 29 अक्तूबर को हुए नाव हादसे के बाद भरथापुर गांव के विस्थापन और पुनर्वास के लिए सरकार ने जिस तेजी से योजना शुरू की थी, उसकी रफ्तार अब लाभार्थियों की सुस्ती के चलते थमती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 136 परिवारों के खातों में दिसंबर 2025 में पहली किस्त के रूप में 40-40 हजार रुपये भेज दिए गए थे, लेकिन चार महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी लाभार्थियों के आवास की नींव तक नहीं पड़ सकी है।
नाव हादसे के बाद पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरथापुर गांव के विस्थापन और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते मूलभूत सुविधाओं से युक्त नई कॉलोनी बसाने की घोषणा की थी। इसके बाद सेमरहना में विकसित की जा रही कॉलोनी का नाम भरतपुर रखा गया और अधिकारियों को निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिए गए।
सरकार ने पुनर्वास योजना को गति देने के लिए भारी बजट स्वीकृत किया। जिला प्रशासन ने सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति और अन्य विभागीय योजनाओं पर काम भी शुरू करा दिया। लाभार्थियों को आवासीय भूखंड आवंटित कर पहली किस्त की धनराशि भी उनके खातों में भेज दी, लेकिन जिन परिवारों के पुनर्वास के लिए पूरी कवायद की गई, उन्हीं के आवास निर्माण कार्य अब तक धरातल पर नहीं उतर सके हैं।
ग्रामीण गिना रहे अपनी मजबूरी
ग्रामीणों की इस सुस्ती से प्रशासन की तय समय सीमा में पुनर्वास योजना पूरी करने की उम्मीदों को झटका लगता दिख रहा है। हालांकि ग्रामीण अपनी मजबूरियां गिना रहे हैं। उनका कहना है कि नई जगह पर बसने से पहले अस्थायी झोपड़ी की व्यवस्था जरूरी है। वहीं निर्माण सामग्री और मजदूरी की बढ़ती कीमतों ने भी उनकी परेशानी बढ़ा दी है। कई परिवारों का कहना है कि पहली किस्त की धनराशि से केवल शुरुआती तैयारी ही संभव हो पा रही है, ऐसे में निर्माण कार्य शुरू करना आसान नहीं है।
दो से तीन दिन में धरातल पर दिखेगा निर्माण
खंड विकास अधिकारी मिहींपुरवा विनोद यादव ने बताया कि आवास निर्माण की निगरानी और लाभार्थियों से समन्वय के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है। अधिकारी लगातार लाभार्थियों के संपर्क में हैं और उन्हें जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अगले दो से तीन दिनों में आवास निर्माण कार्य धरातल पर दिखाई देने लगेगा।