बहराइच। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटे ककरहा और सुजौली रेंज में तेंदुए का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते दो दिनों में हमलों की चार घटनाओं ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। हालात ये हैं कि शाम होते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता है और लोग घर से निकलने में भी डरने लगे हैं। खेत, सड़क और गांव, हर जगह लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
सुजौली, ककरहा और मुर्तिहा वन रेंज के अयोध्यापुरवा, जमुनापुर, सेमरीघटही और परसपुर मझाव कॉलोनी जैसे गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां खेतों में काम करने वाले किसान से लेकर सड़क से गुजरने वाले राहगीर तक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई जगहों पर बाघ और तेंदुए की सक्रियता भी देखी जा रही है।
लगातार हमलों से लोगों का हौसला टूट गया है। किसान दिन में भी खेत की तरफ जाने से कतरा रहे हैं, जबकि बच्चों और महिलाओं को घरों से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है। लोग अब अपने खेत-खलिहान जाने से भी डरने लगे हैं और तेंदुए को पकड़ने की मांग तेज हो गई है।
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बाइक सवार भी सुरक्षित नहीं
अयोध्यापुरवा निवासी रामअवतार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से स्थिति बहुत खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि अब तो खेत जाने में भी डर लगने लगा है। तेंदुआ कभी भी सामने आ जाता है। बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था, अब तो लगता है कि गांव में ही खतरा बढ़ गया है। वहीं जमुनापुर निवासी इरफान अली ने बताया कि रात के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बाइक से निकलना भी मुश्किल हो गया है। कई बार रास्ते में तेंदुआ दिख चुका है। लोग समूह में चलने के लिए मजबूर हैं। बाइक सवार भी सुरक्षित नहीं हैं।
हाल की बड़ी घटनाएं
-11 मार्च : अयोध्यापुरवा निवासी फरजान (8) तेंदुए के हमले में घायल।
-11 मार्च :जमुनापुर निवासी जवाहर सिंह (45) तेंदुए के हमले में घायल।
-10 मार्च : सेमरीघटही निवासी शांति देवी (40) बाघ के हमले में घायल।
-10 मार्च : परसपुर मझाव कॉलोनी निवासी लालू (17) तेंदुए के हमले में घायल।
डीएफओ बोले- टीमें लगातार कर रही हैं गश्त
डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि सभी घायलों को अहेतुक सहायता दी गई है। प्रभावित गांवों के आसपास वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। तेंदुए और बाघ की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और आवश्यक कार्यवाही भी की जा रही है।
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बाघ और तेंदुए दिखें तो ऐसे करें बचाव
-शाम के बाद अकेले खेत या जंगल न जाएं।
-समूह में आवाज करते हुए चलें।
-बच्चों को अंधेरे में बाहर न निकलने दें।
-टॉर्च या रोशनी का उपयोग करें।
-तेंदुआ-बाघ दिखने पर शोर मचाएं और भागने से बचें।