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कतर्निया के वन ग्रामीणों के विस्थापन की कवायद

Sun, 27 Mar 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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लाभ्‍ा - फोटो : अमर उजाला
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वनग्राम भरथापुर से ग्रामीणों का एक दल रविवार को मध्य प्रदेश के लिए रवाना हुआ है। यह दल मध्यप्रदेश में वन ग्रामीणों को विस्थापन के लिए दी जा रही सुविधाओं को देखने के बाद यहां अपने रहन-सहन पर फैसला करेगा। दल को राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के निकट वन ग्राम भरथापुर, बिछिया, रमपुरवा मटेही, टेड़िया समेत आठ गांव हैं। ग्रामीणों की चहल-पहल से जीव जंतुओं को दिक्कत होती है। वहीं मध्य प्रदेश में सरकार ने वन ग्रामीणों को वन विभाग की जमीन के स्थान पर दूसरी जगह बसाने के लिए कार्ययोजना शुरू कर दी है।

इसी के तहत रविवार को वनग्राम भरथापुर के कल्लू, बेचन, रामेश्वर, परमानंद की अगुवाई में छह ग्रामीणों का दल मध्य प्रदेश रवाना हुआ। यात्रा वाहन को राज्यमंत्री समाज कल्याण बंशीधर बौद्ध व डीएफओ आशीष तिवारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राज्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी ग्रामीणों के हित की रक्षा करती है। ऐसे में वन ग्रामीण सुरक्षित जीवन के लिए जंगल के इस पार आकर बस जाएं।
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जंगल में पक्का निर्माण नहीं करा सकते, वहीं जानवरों का भय भी रहता है। सरकार उन्हें जमीन के साथ प्रति परिवार मुआवजा भी देगी। मालूम हो कि मध्यप्रदेश में जो पहले वनग्राम थे, उनका विस्थापन करके वन विभाग ने दूसरी जगह जमीन दे दी है। जहां ग्रामीण रह रहे हैं।

डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश की तरह यहां के ग्रामीणों को विस्थापन के लिए जमीन व परिवार के सदस्य को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे ताकि वह मकान बनवाने के साथ अन्य खर्चा भी उठा पाएं। इस पर ग्रामीणों को विचार करना है।

ग्रामीणों ने दल रवाना करते समय राज्यमंत्री और डीएफओ से सुजौली-हरखापुर मार्ग वन विभाग के अड़ंगे से न बनने की शिकायत की। डीएफओ ने कहा कि वन विभाग जल्द ही एनओसी जारी कर देगा और सड़क निर्माण शुरू हो जाएगा।
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