तराई में बारिश के चलते घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। शुक्रवार को बैराज से तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। उधर घाघरा के उस पार बसे अहाता गांव के छह मजरे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इसके चलते 18 सौ परिवार फंसे हैं। उनके घरों में चूल्हा नहीं जलने से भोजन के लाले हैं। वहीं महसी के चार और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। राहत और बचाव कार्य नाकाफी दिख रहे हैं।
तराई में निरंतर हो रही वर्षा के चलते जनजीवन अस्तव्यस्त है। बाढ़ की विभीषिका महसी, कैसरगंज तहसील क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर 106.536 मीटर सुबह मापा गया। यह खतरे के निशान से 46 सेंटीमीटर अधिक है।
दोपहर से एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से नदी के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई है। ऐसे में बाढ़ की समस्या गहराने लगी है। कैसरगंज तहसील के ग्राम पंचायत अहाता के मजरे हंसरामपुरवा, बवालीपुरवा, गोड़ियनपुरवा, मंशारामपुरवा, गुलजारीपुरवा, बद्रीपुरवा नदी के उस पार बसे हुए हैं।
बाराबंकी की सीमा पर स्थित यह गांव जनपद बहराइच की सीमा में हैं लेकिन यहां पहुंचने के लिए बाराबंकी से घूमकर जाना होता है। घाघरा के कछार में बसे यह गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। उनमें करीब 1800 परिवार हैं। ज्यादातर लोग मेहनत मजदूरी कर परिवार को पालते हैं।
बाढ़ से घिरे होने के चलते ग्रामीण के घर में अनाज खत्म हो गया है। ऐसे में चूल्हा नहीं जल पा रहा है। इसके बावजूद जिला व तहसील प्रशासन अनजान बना है। उधर महसी तहसील क्षेत्र में नदी पार बसे बरुहा बेहड़, उमरिया, चुरलिया और अहिरनपुरवा गांव में पानी फिर घुस गया जिससे स्थिति भयावह हो गई है।
ग्रामीण नाव से पलायन कर रहे हैं। अधिकांश ग्रामीणों की गृहस्थी भी पानी में डूब चुकी है।