कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के मध्य बसे पांच वन ग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा देने की कवायद चल रही है। इसकी फाइल राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने सरकार को भेज दी है। कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पास होते ही पांच वन ग्रामों के आठ हजार बाशिंदों को उनके मूलभूत अधिकार मिल जाएंगे। इस कवायद को रविवार को गोंडा में आयोजित मुख्यमंत्री की घोषणा से भी बल मिला है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीच आजादी के पूर्व से गांव बसे हुए हैं, लेकिन इन वन ग्रामों को राजस्व गांव की सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। इसके चलते वन ग्राम में निवास करने वाले लोग बिजली, पानी, सड़क आदि मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं।
अपने हक और अधिकार के लिए वन ग्रामों के लोग अरसे से संघर्ष कर रहे हैं। इस संघर्ष का नतीजा यह है कि अरसा पूर्व वन ग्राम समितियों का गठन हुआ। इसकी फाइल तैयार हुई। राजस्व ग्राम का दर्जा देने की कवायद शुरू की गई। लेकिन रफ्तार इतनी धीमी है कि संघर्ष के डेढ़ दशक बाद भी अब तक वन ग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिल सका है।
विवार को गोंडा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन ग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा देने की घोषणा की है। इससे एक बार फिर उम्मीद जगी है कि बहराइच के कतर्नियाघाट सेंक्ुचरी में बसे पांच गांवों को भी राजस्व ग्राम का दर्जा मिल सकेगा।
राजस्व ग्राम घोषित करने के लिए वन ग्रामों की फाइल आठ माह से शासन में लंबित है। हाल ही में राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने यह फाइल सरकार के पास भेज दी है। अब मुख्यमंत्री की घोषणा से लगा है कि कैबिनेट की बैठक में मुहर लगते ही पांचों वनग्राम राजस्व गांव में तब्दील हो जाएंगे।
वन ग्रामीणों के हक के लिए संघर्ष करने वाले डॉ. जंग हिंदुस्तानी ने बताया कि पांच वन ग्रामों के अलावा 21 लघु वन ग्राम भी जंगल में बसे हैं। इन वन ग्रामों को भी राजस्व गांव का दर्जा देने के लिए वार्ता चल रही है। दूसरे चक्र में वन ग्राम समितियों का गठन कर दावे और आपत्तियां लिए जाएंगे। इसके साथ ही लघु वन ग्रामों को राजस्व गांव में तब्दील करने की कवायद शुरू होगी।
यह हैं पांच वन ग्राम
भवानीपुर, बिछिया, टेड़िया, ढकिया, दफादार गौढ़ी (गोकुलपुर)।