जिला अस्पताल में बुखार व डायरिया से पीड़ित पांच मासूमों की बुधवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर घर चले गए। वहीं बुखार, डायरिया व निमोनिया से पीड़ित 16 और रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें चार की हालत नाजुक बताई जा रही है।
तराई में बदल रहे मौसम के बीच बुखार और डायरिया कहर बरपा रहे हैं। मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है। पयागपुर के गंगापुर निवासी ननके की डेढ़ वर्षीय पुत्र सचिन को मंगलवार को बुखार के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत हुई।
ननके ने स्थानीय चिकित्सकों से इलाज शुरू कराया। लेकिन देर शाम सचिन की हालत बिगड़ गई। जब स्थानीय डॉक्टरों ने जवाब दिया। तब परिवारीजन उसे लेकर जिला अस्पताल भागे। यहां पर भर्ती कर इलाज शुरू हुआ।
लेकिन इलाज के दौरान बुधवार सुबह सचिन ने दम तोड़ दिया। वहीं रिसिया निवासी सबीन (1) पुत्री नसीम की भी बुखार, उल्टी, दस्त से मौत हो गई। मिहींपुरवा गांव निवासी रामप्रवेश (3) पुत्र राजेश को परिवारीजनों ने डायरिया की चपेट में आने पर मिहींपुरवा कस्बे में निजी डॉक्टरों को दिखाया।
लेकिन स्थिति नहीं सुधरी, तब उसे जिला अस्पताल लाए। इलाज के दौरान ही बुधवार दोपहर बाद रामप्रवेश की भी सांस थम गईं। वहीं मल्हीपुर थाना अंतर्गत परसा गांव निवासी मोहम्मद अनस (4) पुत्र साहिल को तेज बुखार की हालत में जिला अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया गया था।
यहां पर इलाज के दौरान दोपहर में उसकी मौत हो गई। जबकि बलरामपुर के बिसैंधापुरवा निवासी शिवकुमार (2) को बुखार व सांस में तकलीफ होने पर परिवारीजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
उधर विभिन्न संक्रामक रोगों से पीड़ित और 16 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें झब्बू (1), राहुल (3), सृष्टि (2.5) और विशाखा (4) की हालत नाजुक बताई जा रही है। जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा का कहना है कि रोगियों को परिवारीजन काफी गंभीर हालत में लाए थे।