दीपावाली के बाद हुए मौसम में बदलाव से किसान परेशान हैं। धुंध से फसलों पर संकट के बादल छाए हैं। धुंध का ऐसा ही दौर कुछ दिन और जारी रहा तो तिलहन, दलहन व अन्य फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। फसलों को बढ़वार नहीं मिल सकेगी। इससे किसानों को क्षति की पूरी आशंका है।
तराई के बहराइच जिले में 80 फीसदी लोग खेती पर आश्रित हैं। इस बार दीपावली के बाद से अचानक बिगड़ा मौसम का मिजाज किसानों पर भारी पड़ रहा है। दिन में कुछ देर के लिए मामूली धूप निकल रही है। धुंध का असर ग्रामीण अंचलों में दिख रहा है। इससे फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।
पर्याप्त धूप नहीं निकलने के कारण फसलों का उत्पादन प्रभावित होने के आसार हैं। खेतों में खड़ी तिलहन, दलहन व सब्जी की फसलों पर संकट के बादल मडरा रहे हैं। इससे कृषि वैज्ञानिक भी चितिंत हैं। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह का कहना है कि पर्यावरण असंतुलन का स्पष्ट असर दिखाई पड़ रहा है। इस मामले में किसानों को सजग रहने की जरूरत है।
मानव जीवन की तरह प्रभावित होतीं फसलें
वातावरण में हाईजीन गैस का दायरा असंतुलित हो रहा है जिसका असर धुंध के रूप में सामने है। धुंध से मानव जीवन की तरह पेड़-पौधे भी प्रभावित होते हैं। पौधों की बढ़वार रुक जाती है। उत्पादन प्रभावित होता है। कीटों का प्रकोप भी बढ़ेगा। पेड़ कम होने का पर्यावरण पर असर पड़ रहा है। खेतों में पुआल जलाने पर रोक के साथ पर्यावरण प्रदूषण के प्रति सजग होना पड़ेगा।
डॉ. एमवी सिंह, प्रभारी वैज्ञानिक, फसल अनुसंधान केंद्र