लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार दोपहर तराई में झमाझम बरसात हुई। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे। सूख रही गन्ना व धान की फसल को संजीवनी मिली है। उमस से बेहाल लोगों को भी राहत महसूस हुई है। तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि वर्षा के चलते शहर और कस्बों में जगह-जगह जलभराव हो गया जिससे लोगों को परेशानी हुई।
तराई के लोग एक माह से वर्षा का इंतजार कर रहे थे। कभी बूंदाबांदी तो कभी घने काले बादल बिना बरसे लौट जाते। इससे खेतों में फसलें सूख रही थीं। किसान चितिंत थे। शुक्रवार सुबह आसमान में बादल आने लगे। दोपहर को आसमान में छाए काले बादल झमाझम बरसे। दो घंटे तक बारिश हुई। इससे सूख रही धरती तर हो गई।
खेतों में खड़ी धान, गन्ना, अरहर व अन्य तिलहनी फसलों को काफी लाभ पहुंचा है। वर्षा से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि 20 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। बरसात से किसानों को अब सिंचाई करने की जरूरत नहीं है। तीन दिनों तक गरज-चमक के साथ बौछारों का क्रम जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।