कतर्नियाघाट संरक्षित वनक्षेत्र के बर्दिया में ट्री-हट बनाकर रखवाली कर रहे किसान।
बिछिया (बहराइच)। आए दिन वन्यजीवों के हमलों से परेशान वन क्षेत्र से सटे बर्दियां गांव के किसानों ने इससे बचने के लिए नहीं पहल शुरू की है। गांव के किसानों ने इसके लिए खेतों में स्थित पुराने पेड़ों पर ट्री-हट बनाकर खुद के रहने की व्यवस्था की है। पूरे क्षेत्र में बीस से अधिक किसानों द्वारा खेतों में तैयार किए गए ट्री हट में जंगली जानवरों के अचानक हमला कर देने पर बचाव से जुड़े सभी इंतजाम भी मौजूद हैं।
बर्दिया गांव कतर्नियाघाट वन क्षेत्र के जंगल से सटा हुआ है। इसी लिए आए दिन नेपाल से आने वाले हाथियों के साथ बाघ व तेंदुआ के साथ अन्य वन्यजीवों के हमला करने की आशंका से किसान परेशान रहते हैं। कई बार हाथियों के झुंड ने खेत की रखवाली कर रहे किसानों को पटक कर मार भी डाला है। किसानों द्वारा खेतों की रखवाली के लिए बनाए जाने वाले मचान को भी जंगली जानवर उखाड़ फेंकते हैं। इससे बचने के लिए किसानों ने कतर्नियाघाट जंगल में पर्यटकों के लिए बनाए गए ट्री-हट की तर्ज पर अपने खेत में लगे पुराने पेड़ को ही ट्री-हट में तब्दील कर दिया। गांव के बीस से अधिक किसान अब तक खेतों की सुरक्षा के लिए अपना ट्री हट बना चुके हैं।
जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए बने इन ट्री-हट को देखने अब पर्यटक भी काफी संख्या में आने लगे हैं। उन्हें किसानों का यह प्रयोग खूब भा रहा है। यहां तक कि कुछ पर्यटक किसानों से इसे रहने के लिए एक दो दिन किराए पर देने की मांग भी करने लगे हैं। बर्दिया के किसान काशीराम, ननकऊ, घसीटे, गौरी शंकर व रामप्रताप ने बताया कि खेत की रखवाली करने के लिए कई बार मचान बनाया, लेकिन हाथियों ने उसे तोड़ दिया। अब पेड़ पर स्थाई आवास बनाया गया है। इससे निगरानी व देखभाल में काफी सुविधा व सुरक्षा भी मिली है। इसमें जानवरों को बचाने के लिए ढोल, पीपा, बर्तन के साथ हांका लगाने के उपकरण भी रखे गए हैं।