बहराइच। विभिन्न जंगली जानवरों का दीदार करने वाले पर्यटकों को अब जंगल की सैर करने के लिए करीब पांच महीनों इंतजार करना पड़ेगा। 25 जून से कतर्नियाघाट के दरवाजे पर्यटकों के लिए बंद हो जाएंगे। वन विभाग के अनुसार इस साल करीब 17 हजार देसी व विदेशी पर्यटकों ने यहां की सैर की है। अब जंगल 15 नवंबर को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। बारिश के चलते हमेशा जून माह में जंगल में पर्यटकों का आवागमन बंद कर दिया जाता है।
कतर्नियाघाट जैव विविधता की दृष्टि से काफी समृद्ध है। इसलिए यहां पर जलचर, थलचर और विभिन्न प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं। कतर्नियाघाट के बीच से बहने वाली गेरूआ नदी में 70 डॉल्फिन के साथ बहुतायत में घड़ियाल और मगरमच्छ भी पाए जाते हैं। इन्हें देखने के लिए पर्यटक नौका विहार करते हैं। इसी तरह कछुओं के मामले में प्रदेश में मौजूद 15 प्रजातियों में से सर्वाधिक 11 प्रजातियां अकेले कतर्नियाघाट क्षेत्र के सरयू नदी में पाई जाती हैं। यहां पर प्रदेश सरकार का राजकीय पशु बारासिंघा सहित हिरन की पांच प्रजातियां भी पाई जाती हैं। लगभग सात हजार हिरन यहां के जंगल में विचरण करते आसानी से देखे जा सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार 150 से 200 हाथी भी रहते हैं।
जंगल में विचरण करते हैं 59 बाघ
यहां जंगल में 59 बाघ हैं। इसी तरह जंगल और ग्रामीण आबादी में रहने वाले तेंदुओं की संख्या 200 से अधिक है। इतनी बड़ी संख्या में पाए जाने वाले वन्यजीवों को देखने के लिए पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं। यहां पर लगभग दुर्लभ हो चुके गिद्ध भी आसानी से देखे जा सकते हैं। कतर्नियाघाट इलाके में हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में यह बात स्पष्ट हुई कि इस इलाके में गिद्धों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इनकी गिनती के लिए वन विभाग ने 41 टीमें बनाई थीं। अध्ययन में पाया गया कि तीन साल में यहां गिद्धों की संख्या नौ से बढ़कर 159 हो गई है। इस इलाके में यूरेशियन ग्रिफन, रेड हेडेड (राज गिद्ध) सेनेरियस, इजिप्शियन प्रजाति के गिद्ध पूरे वर्ष पाए जाते हैं, जबकि जाड़े में यहां हिमालयन ग्रिफन भी आ जाता है।
थारू संस्कृति को मिला बढ़ावा
इस बार थारू संस्कृति को भी इकोटूरिज्म से जोड़ने के लिए एक अभिनव प्रयोग किया गया। थारू बाहुल्य गांव बर्दिया को इसके लिए चुना गया। जिसके तहत एक डांस ग्रुप तैयार किया गया, जो थारू लोक नृत्य के माघ्यम से पर्यटकों का मनोरंजन करता है। साथ ही थारू भोजन करने की भी व्यवस्था रखी गई है। एक थारू कुटिया भी बनाई गई है जिसमें 1000 रुपये शुल्क देकर पर्यटक थारू गांव में रात गुजार सकते हैं। यहां जंगल में मोतीपुर में चार, ककरहा में चार व कतर्नियाघाट में छह गेस्ट हाउस हैं, जो पर्यटकों के लिए उपलब्ध हैं।
जानवरों की सुरक्षा के लिए उठाया कदम
कतर्नियाघाट में 25 जून की शाम से पर्यटकों का प्रवेश बंद हो जाएगा। 15 नवंबर से अगला पर्यटक सत्र शुरू होगा। बारिश के चलते व जानवरों की सुरक्षा के लिए ऐसा किया जा रहा है।
- बी शिवशंकर, डीएफओ कतर्नियाघाट