बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट में इन दिनों पर्यटकों को दोहरे रोमांच का आनंद मिल रहा है। एक तरफ जहां कतर्निया के मूल रहवासी बाघ जैसे जीव आसानी से नजर आ रहे हैं वहीं नेपाल से पलायन कर आए गजराजों के झुंड भी रोमांच में बढ़ोतरी कर रहे हैं।
मंगलवार को नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से हाथियों का झुंड कतर्नियाघाट सेंक्चुरी पहुंच गया। गजराजों का यह परिवार गेरुआ नदी और उससे जुड़े मैला नाला के तट पर दिखाई दे रहा है।
बोटिंग के दौरान हाथियों को देखकर पर्यटक रोमांचित हो रहे हैं। रह-रहकर हाथियों की चिंघाड़ सुनाई पड़ रही है। इसे वनाधिकारी काफी सुखद मान रहे हैं।
हिमालय की तराई में सुखद मौसम से समृद्ध कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र आजकल पर्यटकों से गुलजार है। यहां आने वाले पर्यटकों को अभी तक बाघ, तेंदुआें और हिरनों के दीदार आसानी से हो रहे थे, लेकिन अब तक हाथी नहीं दिखे थे।
पर्यटकों के भ्रमण के लिए वन विभाग के पास मौजूद हथिनी जयमाला और चंपाकली को देखकर ही पर्यटक लौट जाते थे लेकिन नेपाल के रॉयल बर्दिया नेशनल पार्क से एक-दो नहीं बल्कि 45 हाथियों का झुंड खाता कारीडोर के रास्ते कतर्नियाघाट के जंगल में सोमवार देर रात पहुंच गया।
मंगलवार को ये हाथी गेरुआ और कौड़ियाला नदियों के आसपास दिखाई लोगों को दिखाई पड़े। मैला नाले के तट पर भी हाथी बोटिंग के दौरान पर्यटकों को दिख रहे हैं।
इतनी संख्या में हाथियों का झुंड कतर्निया पहुंचने को वनाधिकारी सुखद मान रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह यह है कि कतर्नियाघाट सेंक्चुरी की आबोहवा हाथियों को रास आ रही है। साथ ही पर्यटकों को दुर्लभ वन्यजीव आसानी से देखने को मिल रहे हैं।