बहराइच। भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से जिलेवासी बेहाल हैं। शहर को 17 घंटे व गांवों को 12 घंटे ही बिजली मिल रही है। बिजली कटने के साथ लो वोल्टेज की समस्या से शहरी क्षेत्र में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। लो वोल्टेज की वजह से टुल्लू पंप नहीं चलते हैं और घरों में लगे कूलर, पंखे भी हवा नहीं दे रहे हैं। लेकिन इसके बाद विभागीय अफसर आंख मूंदकर बैठे है और सब कुछ सही होने का दावा कर रहे है।
सरकार का दावा है कि जिला मुख्यालय में 24 और तहसील मुख्यालय पर 21 घंटे बिजली दी जाएगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे निर्बाध रूप से आपूर्ति होगी, लेकिन पॉवर कॉरपोरेशन विभाग इस आदेश को पलीता लगा रहा है। विभागीय लिखा पढ़ी में शहरी क्षेत्रों में अधिकतम 24 तो तहसील मुख्यालय में 21 घंटे विद्युत आपूर्ति हो रही है। ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली दी जा रही है।
लेकिन हकीकत यह है कि शहरी क्षेत्र में 17, तहसील मुख्यालय पर 15 व गांवों को महज 12 से 13 घंटे ही बिजली मिल रही है। भीषण गर्मी में दिन तो किसी तरह कट जाता है, लेकिन रात में अघोषित कटौती से लोगों की नींद उड़ गई है। जिम्मेदारों की उदासीनता तथा जर्जर व्यवस्था के चलते लोगों को शेड्यूल के अनुसार बिजली नहीं मिल पा रही है।
हुजूरपुर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रेमनाथ सिंह चौहान कहते हैं कि हूजूरपुर विकास खंड मुख्यालय को बमुश्किल 15 घंटे ही बिजली मिल रही है। दिन में कटौती अधिक होने से व्यापारियों को बड़ा नुकसान हो रहा है। वहीं महसी क्षेत्र में 12 घंटे ही बिजली लोगों को मिल रही है। राजी चौराहा निवासी ननकू व धर्मपाल ने बताया कि कटौती से जनजीवन बेहाल है। महसी के बेलासपुरवा, बकैना गांव निवासी जिलेदार ने बताया कि शाम होते ही वोल्टेज की समस्या शुरू हो जाती है। टुल्लू न चलने से पानी नहीं मिलता। पंखे रेंगते रहते हैं जिससे बच्चों को रात में नींद नहीं आती है।
किसानों का सूख रहा गन्ना
मटेरा (बहराइच)। मटेरा फीडर से गांवों को सप्लाई की जाने वाली विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई इै। आम जनमानस भीषण गर्मी में बेहाल है। क्षेत्र में 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है। विद्युत कटौती के कारण किसानों के खेतों में लगी गन्ने की फसल सूख रही है। धान की नर्सरी लगाने के लिए किसानों को परेशानी हो रही है।