बहराइच स्थित विहान बालिका विद्यालय।
बहराइच। मजदूरों के बच्चों को कक्षा आठ तक बेहतर शिक्षा देने के लिए जिले में दो विहान आवासीय विद्यालय खोले गए थे। कस्तूरबा आवासीय विद्यालय के तर्ज पर छात्र-छात्राओं के लिए खोले गए अलग-अलग स्कूल को बंद करने की तैयारी शुरू हो गई थी। इसी बीच विद्यालय को फिर से चलाने की कवायद शुरू हो गई है। अब इन विद्यालयों को चलाने वाला श्रम विभाग बेसिक शिक्षा से मान्यता लेकर स्कूल को चलाएगा। इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए जिले में दो विहान स्कूल खोले गए थे। एक बालकों के लिए है, जो चिलवरिया में है। दूसरा बालिकाओं के लिए है, जो हुजूरपुर ब्लॉक में है। यहां पहले सौ-सौ विद्यार्थियों को आवासीय शिक्षा दिया जाता था। यहां कस्तूरबा आवासीय बालिका विद्यालय के तर्ज पर सभी सुविधाएं मिलती थीं। बच्चों को देख-रेख हो सके। इसके लिए पूर्णकालिक व अंशकालिक शिक्षकों की तैनाती भी की गई है। लेकिन अचानक विगत शिक्षा सत्र में यहां कक्षा छह में नए छात्र व छात्राओं के दाखिले पर रोक लगा दी गई। इसके चलते न तो विगत वर्ष और न ही इस शिक्षा सत्र में बच्चों का दाखिला हुआ। इसलिए अब इन स्कूलों में मात्र 50-50 छात्र ही बचे हैं। यह माना जा रहा था कि अब स्कूल बंद होने वाला है। इसको लेकर श्रमिकों में उदासी का माहौल बन गया था। इसी बीच प्रमुख सचिव श्रम ने जिले के विहान आवासीय बालिका विद्यालय का निरीक्षण किया था। यहां भोजन की गुणवत्ता के साथ ही बच्चों का शिक्षा स्तर सामान्य स्कूलों की तुलना में बेहतर पाया गया। इस सत्यापन के बाद उन्होंने विद्यालय को और आगे चलाने का संकेत दिया था। इसी के बाद शासन ने इन विहान विद्यालयों की मान्यता बेसिक शिक्षा विभाग से कराने के लिए पत्र जिले में भेजा है। ताकि स्कूल को सर्वशिक्षा अभियान से जोड़ा जा सके। इस पत्र के बाद एक बार फिर श्रमिकों में हर्ष का माहौल है।
लविवि का समाज शास्त्र विभाग कर रहा संचालन
जिले के विहान स्कूल का संचालन लखनऊ विश्वविद्यालय का समाज शास्त्र विभाग संचालित कर रहा है। लेकिन दोनों विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा है। सभी जगहों पर अंश व पूर्णकालिक अध्यापक मानक से कम हैं।
विहान स्कूल को पहले बंद करने का पत्र आया था। इसके बाद प्रमुख सचिव ने स्कूल का निरीक्षण किया था। इसी के बाद एक नया पत्र आया है। इसमें बेसिक शिक्षा विभाग से इस स्कूल को मान्यता दिलाने की बात कही गई है। ऐसे में उम्मीद है कि यह स्कूल आगे भी चलेगा। -सिद्धार्थ मोदयानी, सहायक लेबर कमिश्नर