बहराइच/नानपारा। तराई में वर्षा न होने से फसलें सूख रही हैं। वहीं, नहरों में पानी ने छोड़े जाने से भी किसानों के माथे पर बल पड़ गया हा।
चौधरी चरण सिंह सरयू पंप नहर के तीन ट्यूबवेल और पटना जलाशय के दो ट्यूबवेल साल भर से खराब हैं, जिससे जलाशय में पानी इक्ट्ठा ही नहीं हो पा रहा है। इससे खरीफ की 11459 हेक्टेयर खेती प्रभावित हुई है।
वहीं, 8503 हेक्टेयर रबी की खेती पर भी संकट मंडरा रहा है। बहराइच और गोंडा के ढाई लाख किसान प्रभावित हैं। इस मामले में सिंचाई विभाग के अधिकारी विद्युत विभाग पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
बहराइच और गोंडा के खेतों की सिंचाई सरयू नहर से होती है। नानपारा के कलुआ डीह स्थित चौधरी चरण सिंह सरयू पंप नहर में पांच ट्यूबवेल हैं।
इन ट्यूबवेलों का संचालन 3300 केवीए के ट्रांसफार्मर से होता है लेकिन साल भर से ट्रांसफार्मर जला पड़ा है। इसके चलते जेनरेटर के सहारे सिर्फ दो पंप का संचालन जैसे-तैसे हो रहा है, जबकि यहीं से पंप द्वारा पानी पटना जलाशय सरयू नहर खंड तृतीय को भेजा जाता है। लेकिन, सिर्फ दो पंप से पानी की सप्लाई होने के चलते जलाशय भर नहीं पा रहा है।
गौरतलब है कि सरयू नहर खंड तृतीय के पटना जलाशय से आठ माइनर द्वारा सौ किलोमीटर परिक्षेत्र में नहरों को पानी भेजा जाता है। गोंडा के बनगाई और करनैलगंज इलाके भी सिंचित होते हैं पर जलाशय में पानी न होने के चलते माइनरों में पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है।
कलुआडीह स्थित ट्रांसफार्मर के दुरुस्त होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं, पटना पंप नहर पर खराब पड़े दो पंपों को भी दुरुस्त करवाने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
एक पंप से होती है 60 क्यूसेक पानी की सप्लाई
कलुआडीह और पटना पंप नहर पर स्थित एक पंप की 60 क्यूसेक पानी सप्लाई की क्षमता है। इन्हीं पंपों से राप्ती में पानी कम होने पर गर्मी में नदी को भी भरा जाता था लेकिन साल भर से व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित हैं।
नवाबगंज इलाके में खेत हो रहे बंजर
नवाबगंज इलाका असिंचित क्षेत्र माना जाता है। यहां भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे है, जिसके चलते कई स्थानों पर बोरिंग नहीं हो पाती है। पंपिंग सेट का भी सहारा किसान नहीं ले पाते। नहरों के सूखे होने के चलते खेत बंजर होते जा रहे हैं।