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सरयू नदी में साइफन में फंसी डॉल्फिन

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महसी तहसील के जैतापुर में साइफन में फंसे डाल्फिन को बाहर लाते ग्रामीण। - फोटो : BAHRAICH
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महसी (बहराइच)। जैतापुर गांव के पास सरयू नदी में रविवार को मछली के शिकार के चक्कर में एक डॉल्फिन साइफन में फंस गई। ग्रामीणों ने डॉल्फिन के साइफन में फंसे होने की सूचना वन विभाग के कर्मियों को दी। मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से डॉल्फिन को साइफन से बाहर निकाला। इसके बाद उसे ले जाकर घाघरा नदी में छोड़ दिया। डॉल्फिन का वजन लगभग 37 किलो था।
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महसी तहसील क्षेत्र के जैतापुर गांव के पास सरयू नदी की साइफन है। रविवार को दोपहर करीब 12 बजे एक डॉल्फिन शिकार के लिए मछली को पकड़ने के लिए दौड़ी, लेकिन इसी दौरान वह साइफन में फंस गई। आसपास के ग्रामीणों ने साइफन में डॉल्फिन फंसी होने की सूचना वनकर्मियों को दी।
इसके बाद कैसरगंज रेंज के वन क्षेत्राधिकारी नदीम, वन दरोगा जहीरुद्दीन मौके पर पहुंचे तो देखा कि डॉल्फिन सरयू नदी के स्पर नंबर एक के पास साइफन में फंसी हुई है। इस पर वनकर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से डॉल्फिन को बाहर निकाला। इसके बाद वनकर्मियों ने डॉल्फिन को ले जाकर महसी तहसील के घूरदेवी स्थित घाघरा नदी में छोड़ दिया।
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वन क्षेत्राधिकारी नदीम ने बताया कि डॉल्फिन का वजन लगभग 37 किलो था। वह मछली पकड़ने के चक्कर में साइफन में फंस गई। उसे बीच धारा में छोड़ दिया गया है। उसकी उम्र काफी कम थी।
जमीन पर 4.13 मिनट जीवित रहती है डॉल्फिन
वन क्षेत्राधिकारी नदीम ने बताया कि एक सामान्य डॉल्फिन जमीन पर सिर्फ चार मिनट 13 सेकेंड जीवित रह सकती है। इस बीच अगर इससे ज्यादा समय उसने जमीन पर व्यतीत किया तो पानी के अभाव में उसकी मौत हो सकती है। ऐसे में उसे तुरंत पकड़कर घाघरा नदी में छोड़ दिया जाता है।
घाघरा नदी में मिलती है डॉल्फिन
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि डॉल्फिन घाघरा नदी में मिलती है। क्योंकि घाघरा नदी सीधे गंगा नदी की शाखा से जुड़ी हुई है, जिसमें महसी, कैसरगंज के जरवलरोड, मिहींपुरवा के जालिमनगर के अलावा कौड़ियाला व गेरुआ नदी में भी यह पाई जाती हैं। यहां का पानी डॉल्फिन को रास आता है।
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