बहराइच में इंदिरा गांधी स्टेडियम के पास बीच मार्ग पर खड़े आवारा मवेशी।
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सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशी प्रदेश के हर छोटे-बड़े शहर में एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। प्रदेश की राजधानी भी इससे अछूती नहीं है। पिछले दिनों लखनऊ में घर के बाहर टहल रही एक गर्भवती की आवारा सांड ने टक्कर मारकर जान ले ली।
इस घटना के बाद जागे नगर विकास विभाग के विशेष सचिव ने प्रदेश के सभी नगर निकायों को आवारा पशुओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। जबकि नगर पालिका परिषद का कहना है कि उनके पास न तो पशुओं को रखने के इंतजाम हैं और न ही उनके चारे-पानी के लिए बजट उपलब्ध है। ऐसे में इस आदेश का कितना असर होगा आसानी से समझा जा सकता है।
जिले की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। जनवरी से अब तक 28 सड़क हादसे आवारा पशुओं के चलते हुए। जिनमें दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। नगरपालिका परिषद बहराइच में ही लगभग तीन हजार से अधिक आवारा पशु सड़कों पर घूमते हैं।
वहीं, नगरपालिका नानपारा और नगर पंचायत जरवल व रिसिया में भी लगभग सात हजार के करीब आवारा पशु हैं। कहने को तो जिला पंचायत के पास 18 के करीब कांजी हाउस हैं, लेकिन उनमें भी आवारा पशुओं को रखने और चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। कांजी हाउस में पालतू मवेशियों को रखने की बात सामने आ रही है।
छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए तीन गौशालाएं बनी हुई हैं। बिछिया के गौसदन में कुछ गायों को रखा गया था। हालांकि इसके लिए अलग से किसी बजट की व्यवस्था नहीं है। सामाजिक प्रयासों से चारे, पानी, दवा आदि की व्यवस्थाएं की जाती है। -डॉ. बलवंत सिंह, सीवीओ, बहराइच