मिहींपुरवा। अवैध अस्पतालों के संचालन के मामले में स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। अप्रैल में सीएमओ और एसडीएम के संयुक्त छापे के दौरान सील किए गए कृष्णा हॉस्पिटल, पांडेयपुरवा को दोबारा खोलने के आदेश के बाद विवाद खड़ा हो गया है। मामले में एसडीएम ने पूर्व चिकित्सा अधीक्षक से जवाब तलब किया है।
सीएचसी मोतीपुर के पूर्व अधीक्षक डॉ. थानेदार ने 12 मई को अस्पताल खोलने का आदेश जारी किया था। इस पर एसडीएम राम दयाल ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पूर्व अधीक्षक को पत्र भेजकर बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगा है।
एसडीएम ने अपने पत्र में पूछा है कि जब 30 अप्रैल को उनका स्थानांतरण चरदा हो चुका था, तब 12 मई को किस अधिकार से अस्पताल खोलने का आदेश जारी किया गया। साथ ही झोलाछाप शब्द का अर्थ स्पष्ट करने और यह बताने को कहा है कि किन परिस्थितियों में अवैध अस्पताल, मेडिकल स्टोर और अन्य संस्थान इस श्रेणी में आते हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सील किए गए अस्पताल में बेड, एक्स-रे मशीन, ड्रिप स्टैंड और मेडिकल स्टोर जैसी सुविधाएं मौजूद थीं। एसडीएम ने पूछा है कि क्या ऐसी गतिविधियां भी झोलाछाप श्रेणी में शामिल मानी जाएंगी।
एसडीएम राम दयाल ने बताया कि कृष्णा हॉस्पिटल को सीएमओ की मौजूदगी में सील किया गया था। बाद में पूर्व चिकित्सा अधीक्षक द्वारा अस्पताल खोलने संबंधी आदेश भेजा गया, जिस पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को भी भेज दी गई है और आगे का निर्णय वहीं से लिया जाएगा।
वहीं, डॉ. थानेदार ने कहा कि तहसील मिहींपुरवा और नानपारा क्षेत्र को छोड़कर बलहा ब्लॉक में झोलाछाप नोडल की जिम्मेदारी अभी भी उनके पास है। उनके अनुसार झोलाछाप की श्रेणी में अवैध अस्पताल, मेडिकल स्टोर और अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एसडीएम को पत्र भेजकर पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी गई है।