गुरुवार को सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह में पैरहन शरीफ की जियारत करते जायरीन।
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बहराइच। सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर 1013वां उर्स चल रहा है। इसी के तहत गुरुवार को उर्स के तीसरे दिन गाजी के पैरहन शरीफ का दीदार कर लोगों ने अमन-चैन की दुआ की।
गाजी की शान में दिन भर कव्वाली का दौर चला। अकीदतमंदों ने चादर पेश कर दरगाह पर हाजिरी लगाई। दिन भर जायरीन का तांता लगा रहा।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर उर्स के तीसरे दिन की शुरुआत परंपरागत कुरानख्वानी से हुई। इसके बाद दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद शमशाद अहमद की अगुवाई में खादिमों ने दरगाह में मौजूद तबर्रुकात का कमरे खोला।
अदब और एहतराम के साथ कमरे में सहेजकर रख गए सैयद सालार मसऊद गाजी के पैरहन शरीफ (गाजी का पहनावा) को जायरीन के दीदार के लिए रखा गया। पैरहन शरीफ के साथ ही कुरान-ए-करीम भी मौजूद था। ऐसा बताया जाता है कि कुरान-ए-करीम गाजी ने अपने हाथों से लिखी थी।
दरगाह शरीफ पर आने वाले जायरीन ने नाल दरवाजा होते हुए गाजी की दरगाह पर हाजिरी लगाकर पैरहन शरीफ और कुरान-ए-करीम का दीदार कर दुआएं मांगीं। दरगाह प्रबंध समिति के सदस्य बच्चे भारती ने बताया कि मुख्य उर्स में शामिल होने के लिए तमाम जायरीन मेला परिसर में पहुंच चुके हैं। जायरीन के ठहरने के लिए सभी इंतजाम कर लिए गए हैं।
उर्स का मुख्य दिन आज
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद शमशाद अहमद ने बताया कि शुक्रवार सुबह फज्र की नमाज और कुरानख्वानी के साथ उर्स के कार्यक्रमों का आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि उर्स के मुख्य दिन पर परंपरागत तरीकों से गाजी की दरगाह पर चादर पेश की जाएगी।