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निक्षय पोर्टल पर दर्ज होगा क्षय रोगियों का ब्योरा

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बहराइच। केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2025 तक देश को क्षयरोग से मुक्त करने की कार्ययोजना बनाई गई है। कार्ययोजना के तहत सरकार की ओर से निक्षय टू पोर्टल लांच किया गया है। इस पोर्टल पर मरीजों का पूरा ब्यौरा दर्ज कर इसी के माध्यम से संबंधित मरीजों को दवाइयां प्राप्त हो रहीं हैं या नहीं, इसकी निगरानी रखी जायेगी। विभाग ने पोर्टल पर सूचनाएं दर्ज करना शुरू कर दिया है। पोर्टल से जुड़ने के बाद मिलने वाले आईडी नंबर से देश में किसी भी अस्पताल से मरीजों को दवा मिल सकेगी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक देश को क्षयरोग से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लिया है। संकल्प को सकार करने के लिए सरकार की ओर से निक्षय टू पोर्टल को लांच किया गया है। पोर्टल पर सीबीनैट मशीन की जांच रिपोर्ट जोड़ते ही पहुंच जाएगी। टीबी मरीजों का पोर्टल पर सत्यापन करते ही उनका बैंक डिटेल भी अपडेट होने के साथ उनका इलाज शुरू हो जाएगा। इस दौरान मरीज को पौष्टिक आहार के लिए पांच सौ रुपये मासिक राशि भी प्राप्त होने लगेगी।
सरकारी व निजी चिकित्सकों के यहां इलाज कराने पर पोर्टल काफी कारगर साबित होगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संदीप ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से लांच किया गया पोर्टल मोबाइल व टैबलेट पर अपलोड कर मरीजों को इलाज की जानकारी प्राप्त होती रहेगी। जबकि लैब व केमिस्ट को भी एक ही स्थान पर मरीजों के सत्यापन करने की सुविधा मिल सकेगी। क्षय रोग चिकित्सक ने बताया कि एचआईवी मरीजों के विवरण संबंधी पोर्टल 99 डाट्स को भी इसी पोर्टल पर जोड़कर टीबी व एचआइवी मरीजों की जानकारी एक ही साथ प्राप्त हो जाएगी।
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टोल फ्री नंबर से मिलगी दवा की जानकारी
डॉ. संदीप ने बताया कि अब सरकार की ओर से यह व्यवस्था भी बनाई जा रही है कि दवा के पैकेट के साथ एक टोल फ्री नंबर होगा। जिस पर फोन करके बताना होगा कि मरीज ने दवा प्राप्त कर ली है। इससे पूर्व यह व्यवस्था एचआइवी के मरीजों के पास थी। डॉ. संदीप ने बताया कि आने वाले समय में पैकेट पर चिप की सुविधा भी कर दी जायेगी। इससे पैकेट खोलते ही पता चल सकेगा कि मरीज ने दवा खाई है या नही।
क्या है निक्षय टू पोर्टल
निक्षय पोर्टल टू पर जोड़ने के बाद टीबी मरीज का सत्यापन हो जायेगा। मरीज को सात अंक की एक डिजिटल आईडी आवंटित होगी। इस आईडी के माध्यम से मरीज देश में कहीं भी दवा प्राप्त कर सकता है। इस आईडी नंबर से मरीज का फालोअप करने में आसानी होगी।
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