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दिमागी बुखार से तीन बच्चों की मौत

Wed, 31 Aug 2016 11:50 PM IST
बहराइच उत्तर प्रदेश भारत
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बहराइच में जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
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तराई में दिमागी बुखार ने विकराल रूप अख्तियार कर लिया है। बुधवार को जिला अस्पताल में बुखार पीड़ित तीन मासूमों की इलाज के दौरान सांसे थम गईं। जबकि अचानक बढ़े प्रकोप से पीडियाट्रिक आईसीयू बुखार के मरीजों से फुल हो गया है। संसाधन कम पड़ते दिख रहे हैं।
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बुखार पीड़ित 38 रोगियों का रक्त परीक्षण जेई किट से किया गया। इनमें से 23 बुखार पीड़ित बच्चे दिमागी बुखार के पॉजिटिव मिले हैं। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। भर्ती रोगियों में छह की हालत नाजुक बताई जा रही है। 

प्रतिवर्ष दिमागी बुखार (जेई,एईएस) से तिल-तिलकर मासूम कराहते हुए दम तोड़ते हैं। एक बार फिर से तराई में दिमागी बुुखार कहर बरपाने लगा है। मासूम जद में आ रहे हैं। आईसीयू वार्ड में बुधवार को भर्ती फखरपुर वजीरगंज निवासी अली (5) पुत्र अकरम, अबू जैल (4) पुत्र यासीन निवासी मुकाम रिसिया और भिनगा निवासी गीता (20) पुत्री बंशीलाल की इलाज के दौरान सांसे थम गईं।
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वहीं 38 रोगी भर्ती हुए हैं। इन सभी का रक्त का नमूना लेकर जेई किट से जांच की गई तो 23 बुखार पीड़ित बच्चे दिमागी बुखार पॉजिटिव पाए गए। इस सत्र में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में दिमागी बुखार के रोगी मिले हैं। इससे अस्पताल प्रशासन सकते में आ गया है।

सभी का इलाज शुरू किया गया है लेकिन इनमें नानपारा गिरधरपुर निवासी कृष्णा (6), दरगाह शरीफ निवासी राज (3), नवाबगंज बुधई गांव निवासी अंकिता (7), खैरा धौकल रामगांव निवासी रोशनी (3), नानपारा तसरीन (8) और फखरपुर निवासी अमन यादव (10) वर्ष की हालत नाजुक बताई जा रही है। इन बच्चों को उनके परिवारीजनों ने बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल पहुंचाया है।

जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी पांडेय ने बताया कि जेई के 23 और रोगी पॉजिटिव मिले हैं। दिमागी बुखार से निपटने के लिए दवाइयां मौजूद हैं। उपलब्ध संसाधनों व कर्मियों की मदद से जेई, एईएस वार्ड का संचालन हो रहा है। रोगियों की हर संभव जिंदगी बचाई जाएगी।  

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि सत्र मेें पहली बार 23 की संख्या में रोगी दिमागी बुखार के पॉजिटिव मिले हैं। इसकी चपेट में अमूमन एक से दस साल उम्र तक के बच्चे अधिक आते हैं। दिमागी बुखार में सिर में पानी भर जाता है। जिससे तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके सिंह का कहना है कि इंसेफेलाईटिस रोग के प्रति निरोधात्मक कार्रवाई चल रही है। सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में छिड़काव व फाॅगिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जेई टीकाकरण भी चल रहा है। 

जेई, एईएस के लक्षण हैं बुखार, सिर दर्द, उल्टी, दस्त, बोलने की शक्ति प्रभावित हो जाती है, हाथ-पैरों का कांपना, शरीर में अकड़न, मेमोरी लॉस, व्यवहारिक परिवर्तन। 
 
जिले के चौदह ब्लॉकों में सबसे ज्यादा प्रभावित मोतीपुर, बाबागंज, पयागपुर, चित्तौरा, शिवपुर, अमवा हुसैनपुर है। गत तीन सालोें में सबसे ज्यादा इंसेफेलाईटिस के केस यहीं प्राप्त हुए हैं। इसके चलते स्वास्थ्य महकमें ने इसे डेंजर जोन घोषित किया है।

नगरौर गांव में चार दिन पूर्व दिमागी बुखार का एक रोगी मिला था। इसके बाद गांव के अन्य बच्चों का रक्त परीक्षण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। टीम ने 22 बच्चों की रक्त पट्टिकाओं की स्लाइड बनाई है। उसे परीक्षण के लिए जिला अस्पताल के पैथालॉजी भेजा गया है।

तराई में दिमागी बुखार के चलते अब तक चार मौतें हो चुकी हैं। नौ रोगी पॉजिटिव मिले हैं। इनमें एक रोगी नगरौर गांव का भी शामिल है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. डीके सिंह ने बताया कि दोपहर बाद बीएचडब्ल्यू मनोज जायसवाल और जुनैद अहमद की अगुवाई में टीम को नगरौर गांव भेजा गया।

जिन लोगों को बुखार और हरारत की शिकायत थी। उनकी रक्त पट्टिकाएं बनाई गईं। ऐसे 22 बच्चे चिह्नित हुए हैं। परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। 
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