बहराइच। एक बुजुर्ग को छह महीने पहले पागल कुत्ते ने काट लिया था। छह माह बाद बुजुर्ग अजीब हरकतें करने लगे। इस पर रविवार को परिवारीजन उन्हें मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए लेकर पहुंचे। डॉक्टर ने हाइड्रोफोबिया बताते हुए लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ में इलाज के दौरान बुजुर्ग की मौत हो गई।
थाना खैरीघाट क्षेत्र के ग्राम पंचायत अरनवा नौवनपुरवा गांव निवासी कमला प्रसाद (55) को छह माह पहले खाना खाते समय गर्दन में पागल कुत्ते ने काट लिया था। बुजुर्ग ने एंटी रैबीज वैक्सीन की पूरी डोज नहीं लगवाई थी। उनके पुत्र सतीश कुमार ने बताया कि दो-तीन दिनों से उन्हें पानी, हवा और प्रकाश से डर लग रहा था। रविवार की शाम हालत खराब होने पर वे मेडिकल कॉलेज लेकर आए। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने लखनऊ के लिए रेफर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब कुत्ते ने काटा था, तब डॉक्टर ने पांच डोज लगवाने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने तीन ही डोज लगवाई थी।
लाइलाज है रैबीज, जरूर लगवाएं टीका
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ.पी तिवारी ने बताया कि चूहे को छोड़कर सभी चार पैर वाले स्तनधारी जानवर के काटने पर रैबीज होने का खतरा रहता है। आमतौर पर इसके लक्षण तीन से लेकर 10 दिन में दिख जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ज्यादा वक्त भी लग जाता है। इसलिए कुत्ता, बंदर, बिल्ली, गाय, भैंस, घोड़ा, गधा कोई भी शाकाहारी या मांसाहारी जानवर चाहे वह स्वस्थ हो या पागल हो, काटने वाले दिन ही एंटी रैबीज का पहला टीका अवश्य लगवाना चाहिए। क्योंकि एक बार रैबीज होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है।
जानवर के काटने के तुरंत बाद क्या करें
जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. निर्मेष श्रीवास्तव ने बताया कि सबसे पहले बहते हुए पानी से घाव को साबुन पानी के झाग से अच्छी तरह 15 मिनट तक धोना चाहिए। इस दौरान थोड़ा खून बहता है तो चिंता न करें। वयस्क होने की स्थिति में घाव को खुद ही धोना चाहिए। वहीं बच्चे की स्थिति में रबर के दस्ताने पहनकर घर का कोई भी सदस्य घाव धो सकता है। उन्होंने बताया घाव धोने के बाद उसी दिन एंटी रैबीज का पहला टीका नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लगवाना चाहिए। ऐसा करने से शत प्रतिशत रैबीज से बचा जा सकता है।