बहराइच। सूर्य उपासना का मुख्य पर्व डाला छठ मनाने के लिए श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह दिख रहा है। आज अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं सुख-समृद्धि का निर्वहन करेंगी।
इससे पहले सोमवार को खरना की परंपरा विधिविधान से निभाई गई। मीठे पकवान बनाकर महिलाओं ने पूजित तालाब और नदियों के तट पर पिंडियों को दुरुस्त किया।
छठ पूजा की शुरुआत रविवार को नहाय-खाय से हुई। सोमवार को खरना के तहत चावल का मीठा पकवान बनाया गया। मंगलवार को माताएं पूरे दिन निराजल व्रत रहकर शाम को नदी, तालाब व नहरों के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी।
इस दौरान फल, गन्ना और पकवान का भोग भी लगाया जाएगा, जबकि बुधवार को भोर में उगते सूर्य को प्रात:काल अर्घ्य देकर माताएं अपने पुत्रों के सलामती की दुआ मांगते हुए व्रत तोड़ेंगी।
अस्ताचलगामी सूर्योपासना के लिए सोमवार को शहर के बेरिया मंदिर स्थित तालाब के तट पर महिलाओं ने पिंडी को दुरुस्त कर पूजा स्थल का निर्धारण किया।
उधर, रुपईडीहा में भारत-नेपाल सरहद क्षेत्र में भी छठ पर्व को लेकर लोगों में काफी उल्लास है। रुपईडीहा स्थित हनुमंत सरोवर पर छठ पर्व को लेकर इंतजाम किया गया है।
स्थानीय प्रशासन की तरफ से हनुमंत सरोवर के घाट पर प्रकाश व सफाई व्यवस्था के इंतजाम हुए हैं। पर्व को लेकर नेपाल में भी इंतजाम किया गया है। बागेश्वरी मंदिर स्थित तालाब व रानी तालाब के तट पर सफाई की जा रही है। प्रकाश के लिए भी इंतजाम किए गए हैं।