बहराइच। भारत-नेपाल सीमा पर पकड़े गए प्रतिबंधित संगठन ''वारिस पंजाब दे'' से जुड़े नेटवर्क की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार संगठन का सक्रिय सदस्य विक्रमजीत सिंह पिछले करीब एक वर्ष से नेपाल में रहकर लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। जांच एजेंसियों के अनुसार वह काठमांडू, पोखरा और जनकपुर सहित विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग पहचान और संपर्कों के सहारे ठहरता रहा तथा संगठन के नेटवर्क को सक्रिय रखने की कोशिश करता रहा।
जांच में यह भी सामने आया है कि विक्रमजीत सिंह पूरे समय संगठन के सक्रिय सदस्य जोगा सिंह के संपर्क में था। दोनों के बीच लगातार फोन पर बातचीत होती रही। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां कॉल डिटेल, डिजिटल साक्ष्य और सीमा पार संपर्कों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि भारत लौटने का उद्देश्य केवल सीमा पार करना नहीं, बल्कि संगठन की गतिविधियों को दोबारा सक्रिय करना था।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि संगठन किसी बड़ी गतिविधि की तैयारी में था। इसी कारण अमेरिका से मनवीर सिंह ढिल्लों को भी नेपाल के रास्ते भारत लाने की योजना बनाई गई। हालांकि एसएसबी और रुपईडीहा पुलिस की संयुक्त सतर्कता से पूरी योजना सीमा पर ही विफल हो गई।
पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि पूछताछ में जोगा सिंह ने स्वीकार किया है कि उसने करीब एक वर्ष पहले विक्रमजीत सिंह को नेपाल पहुंचाने में मदद की थी। यही नहीं, वर्ष 2023 के चर्चित अजनाला थाना कांड के बाद संगठन प्रमुख अमृतपाल सिंह को फरारी के दौरान शरण देने में भी उसकी भूमिका सामने आई है। इस मामले में उसके विरुद्ध पंजाब के मेहतियाना थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है।
अब आईबी, एसएसबी, स्थानीय पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नेपाल में रहते हुए विक्रमजीत किन लोगों के संपर्क में रहा, उसे आर्थिक सहायता कहां से मिलती रही और भारत में प्रवेश के बाद संगठन की आगे की क्या रणनीति थी। जांच एजेंसियां सीमा पार नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह तथा स्थानीय सहयोगियों की भूमिका भी खंगाल रही हैं।
नेपाल में ऐसे बदलता रहा ठिकाना
- करीब एक वर्ष पहले जोगा सिंह की मदद से नेपाल पहुंचा था विक्रमजीत।
- काठमांडू, पोखरा और जनकपुर में अलग-अलग ठिकानों पर रहा।
-पहचान छिपाने के लिए लगातार वेश बदलने की आशंका।
-भारत लौटने के लिए स्थानीय नेटवर्क और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया।
- जोगा सिंह और अन्य सहयोगियों से लगातार संपर्क बना रहा।
क्या है वारिस पंजाब दे संगठन
- पंजाब से जुड़ा एक कट्टरपंथी संगठन, जिसकी गतिविधियां लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं।
- वर्ष 2023 के अजनाला थाना पर हुए हमले के बाद संगठन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।
- पुलिस के अनुसार संगठन से जुड़े कई सदस्यों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में आपराधिक मामले दर्ज हैं।
- सुरक्षा एजेंसियां इसके अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच करती रही हैं।