3-4 बार बच्चे को पटका, फिर पानी के अंदर ले गया
ग्रामीण सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मगरमच्छ बच्चे को लेकर चला गया। कुछ देर बाद वह बच्चे को जबड़े में दबाकर पानी से बाहर आया। उसने बच्चे को कई बार पटकने के बाद फिर पानी के अंदर ले गया। ग्रामीणों ने बड़े-बड़े बांस के डंडों की मदद से नदी में तलाश शुरू की। तब तक पुलिस, वन विभाग और NDRF की टीम भी पहुंच गई थी।
12 साल के बालक को मगरमच्छ जिंदा खा गया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
बालक को निवाला बनाता रहा मगरमच्छ, बेबस देखते रहे लोग
तिकुरी गांव निवासी सुनील सिंह (12) के पिता बुधराज सिंह और मां की अरसे पहले मौत हो चुकी है। वह अपने चाचा विजयराज सिंह के पास तीन छोटे भाई बहनों के साथ रहता था। सुनील गांव के जूनियर विद्यालय में कक्षा छह का छात्र था। स्कूल से आने के बाद वह चाचा के साथ खेती किसानी के काम में हाथ बंटाता था।
इसी के तहत बृहस्पतिवार को दोपहर में वह स्कूल से आने के बाद सरयू नदी के किनारे स्थित खेत में धान की नर्सरी लगवाने गया था। शाम को काम खत्म होने के बाद जब सभी घर चलने को हुए तो हाथ पैर में कीचड़ लगा होने के कारण सुनील नदी के तट पर पहुंचकर धोने लगा।
इसी दौरान नदी के किनारे झाड़ियों में छिपे मगरमच्छ ने हमला कर उसे दबोच लिया और नदी में खींच ले गया। चाचा विजयराज ने शोर मचाते हुए भतीजे को बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन मगरमच्छ की पकड़ से उसे छुड़ा नहीं सके।
माता-पिता की हो चुकी है मौत
सुनील पहले से ही अनाथ था। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मां का सात वर्ष पहले और पिता का पांच वर्ष पहले बीमारी से निधन हो चुका था। अब परिवार में 14 वर्षीय बहन सुमन, 10 वर्षीय भाई संजय और सात वर्षीय बहन सीमा ही बचे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। सिर्फ चाचा का ही सहारा है। घटना के बाद गांव के लोग बच्चों की मदद के लिए आगे आने लगे हैं और चंदा भी एकत्र किया जा रहा है।
गांव में दहशत
घटना के बाद तिंकुरी और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। किसान नदी किनारे खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी मोहम्मद शाकिब ने बताया कि सरयू किनारे बसे गांवों में मुनादी कराकर लोगों को नदी से दूर रहने की चेतावनी दी जा रही है। मगरमच्छ को पकड़ने के लिए जाल लगाने, अतिरिक्त गश्त बढ़ाने और चेतावनी बोर्ड लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।