मजदूरों के लिए आईं साइकिलें श्रम विभाग ने दलालों के साथ मिलकर बेच दीं। मामले की गोपनीय सूचना पर डीएम ने टीम गठित कर जांच कराई तो श्रम विभाग के कर्मचारियों व दलालों की मिलीभगत से साइकिलें बेचने का खुलासा हुआ। जांच टीम ने चार साइकिलें बरामद की हैं।
मामले में डीएम के निर्देश पर श्रम विभाग के वितरण व पंजीकरण रजिस्टर के साथ ही कार्यालय में खड़ी 199 साइकिलों को सीज किया गया है। इस रैकेट के सरगना को पुलिस तलाश रही है। श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों को साइकिल सहायता योजना के तहत दिसंबर में तीन हजार साइकिलें मिलनी थीं।
इसके लिए 2585 लाभार्थियों का चयन करके 2296 को साइकिल देने के लिए टोकन दिया गया था। इसी बीच डीएम को श्रम विभाग व दलालों की मिलीभगत से अपात्रों का पंजीकरण कर साइकिल देने व दलालों के माध्यम से मजदूरों की साइकिलें बेचने की शिकायत मिली।
इस पर उन्होंने सीडीओ एनपी सिंह की अध्यक्षता में टीम गठित कर मामले की जांच का निर्देश दिया था। रविवार दोपहर सीडीओ को सूचना मिली कि ग्राम पंचायत किशुनपुर चोरवाभारी के मजरा छोटकी मुर्तिहा में कन्हैयालाल तिवारी के घर में एक दलाल ने चार साइकिलें छिपाकर रखीं हैं। टीम ने छापेमारी कर कन्हैयालाल के घर से चारों साइकिलें बरामद कर लीं।
पूछताछ में कन्हैयालाल के भतीजे ने खुलासा किया कि उसके मामा के दामाद प्रदीप पांडेय निवासी कटकुइया जोखवा बाजार द्वारा 2100 रुपये लेकर साइकिल दिलाई जाती है। 1500 एडवांस व 600 रुपये साइकिल देते समय लिए जाते हैं। बरामद साइकिलें उन लोगों की हैं जिन्होंने साइकिल वितरण के समय 600 रुपये दलाल को नहीं दिए थे।
इसके साथ ये भी खुलासा हुआ कि ये साइकिलें जिन्हें आवंटित हुईं वे मजदूर नहीं बल्कि खेतीबाड़ी करते हैं। इसी के साथ सीडीओ ने वितरण क्रम संख्या 702 पर दर्ज गुड्डू निवासी बरदेहरा भारी व 711 पर दर्ज तय्यब अली निवासी बरदेहरा भारी को भी पकड़ा।
जिनके पंजीकरण के समय मनरेगा में 50 दिन काम करने की सूचना अंकित थी। मगर जॉब कार्ड में उन्होंने मात्र 6-13 दिन ही कार्य किया था।