रुपईडीहा/बाबागंज। भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन पूरी तरह ठप है। सोमवार रात हुए संघर्ष के बाद सुबह फिर मधेसियों ने नाकेबंदी कर दी।
भारत से वाहनों का प्रवेश नेपाल में नहीं हो पा रहे है, जिसके चलते भारतीय क्षेत्र में वाहनों की कतारें लगी रहीं। हालांकि, दोनों तरफ सुरक्षा बल मोर्चा संभाल रहे हैं।
संयुक्त तराई मधेस मुक्ति मोर्चा के बैनर तले नेपाल के मधेस समुदाय के लोग स्वायत्त मधेस प्रदेश स्थापना की मांग पर अड़े हैं।
इसे लेकर मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने रविवार से भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल परिक्षेत्र में अनिश्चितकालीन आंदोलन कर नाकेबंदी कर दी है, जिसके चलते भारत और नेपाल के बीच खाद्य-पदार्थों के ट्रकों का आवागमन ठप है। पेट्रो उत्पाद भी नेपाल नहीं पहुंच रहा है।
मधेसी नागरिकों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए सोमवार देर रात नेपाल मूल के कुछ लोगों ने आंदोलनकारियों को भगाने की कोशिश की जिसको लेकर संघर्ष हुआ। पेट्रोल बम फेंके गए।
नेपाल पुलिस ने रबर की गोलियां दागीं। पूरी रात कर्फ्यू लगा रहा। हालांकि भोर में कर्फ्यू हटा दिया गया। इसके बाद सुबह छह बजे मधेस आंदोलनकारी फिर सीमा पर पहुंच गए।
मोर्चा के पशुपति दयाल मिश्र, कमरुद्दीन राई, ललित रौनियाल, कौशल किशोर, राजकिशोर, प्रभा मिश्रा की अगुवाई में 200 से अधिक मधेसी कार्यकर्ताओं ने इंडो-नेपाल मुख्य द्वार पर फिर नाकाबंदी कर दी, जिसके चलते आवागमन मंगलवार को भी बहाल नहीं हो सका।
विवाद बढ़ने की आशंका के मद्देनजर नेपाल पुलिस बल ने सशस्त्र मोर्चा संभाल लिया। वहीं भारत सीमा क्षेत्र में सीओ नानपारा भरत यादव, एसएसबी के डिप्टी कमांडेंट जयप्रकाश फोर्स के साथ मुस्तैद रहे।
वार्ता हुई विफल
सीमा पर मधेसी आंदोलनकारियों की नाकाबंदी को खत्म करवाने के लिए एसएसबी और नेपाल पुलिस के अधिकारियों ने सीमा पर वार्ता शुरू की। भनक लगने पर मधेसी आंदोलनकारी मौके पर पहुंच गए और वार्ता का विरोध करने लगे। इस पर दोनों देशों के अधिकारी अपनी सीमा में चले गए। वार्ता विफल हो गई।