फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

113 कछुओं समेत तस्कर दबोचा

Tue, 25 Aug 2015 10:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
विज्ञापन
विज्ञापन
जरवलरोड (बहराइच)। तराई के नदी और तालाबों में मिलने वाले दुर्लभ प्रजाति के कछुओं पर तस्करों की नजर लगी है। मंगलवार को 113 कछुओं की खेप लेकर कोलकाता जा रहे तस्कर को जरवलरोड पुलिस ने दबोच लिया।
विज्ञापन


पकड़ा गया तस्कर पश्चिम बंगाल के मालदा का निवासी है। उसने कछुओं को गोंडा के कर्नलगंज इलाके के तालाब और नदियों से पकड़ने की पुष्टि की है। वन विभाग को सूचना दी गई है।
 
तराई में पाए जाने वाले भूतकाठा प्रजाति के कछुओं की डिमांड पश्चिम बंगाल व खाड़ी देशों में अधिक है, जिसके चलते तस्कर तराई का रुख करते हैं।

मंगलवार दोपहर जरवलरोड थानाध्यक्ष आरपी पांडेय को कछुओं की खेप बाहर ले जाए जाने की खबर मिली। इस पर एसओ ने उपनिरीक्षक ओपी सिंह की अगुवाई में टीम गठित की, जिसने जरवलरोड तिराहे पर घेराबंदी कर एक व्यक्ति को दबोचा।
विज्ञापन


तलाशी के दौरान उसके पास मौजूद टोकरी और बैग से 113 कछुए बरामद हुए। तस्कर की पहचान कोलकाता के मालदा पानीपत निवासी शमीम अहमद के रूप में हुई है।

शमीम ने बताया कि वह सप्ताह भर से गोंडा जिले के कर्नलगंज में डेरा डाले हुए था। यहां रईस नाम के व्यक्ति ने शिकारियों का इंतजाम करवाया। उन्हीं की मदद से तालाब और नदियों से कछुए पकड़े गए हैं।

कछुओं के खेप की तस्करी की सूचना पाकर कैसरगंज रेंज के वन क्षेत्राधिकारी टीएस मिश्रा भी जरवलरोड पहुंचे। डीएफओ अखिलेश पांडेय ने बताया कि बरामद कछुओं को तालाब और नदियों में छुड़वाया जाएगा।

विदेशों में है अधिक डिमांड
टर्टल सरवाइवल एलायंस के प्रोजेक्ट कोऑर्डीनेटर भास्करमणि दीक्षित ने बताया कि बरामद कछुओं को हिंदी भाषा में भूतकाठा के नाम से जाना जाता है, जबकि इनका वैज्ञानिक नाम जियो क्लेनिक हैमिलटोली है। अंग्रेजी में इन कछुओं को स्पॉटेड पांड टर्टल कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन कछुओं की जीवित हालत में कीमत 50 से 60 हजार के बीच है। अधिकांश कछुए रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें