बहराइच/नानपारा। कंप्यूटर सेंटर पर फर्जी डीएसओ और एसडीएम दफ्तर संचालित करने वाले श्यामबिहारी के पास पूर्ति विभाग के गोपनीय कोड थे। इसके जरिए वह कार्ड धारकों के नाम व पते में हेरफेर कर पात्रों को अपात्र अपात्रों को पात्र बनाने का खेल करता था।
विभाग में उसकी जड़ें गहरी थीं। जिसके चलते वह एक दशक से सरकारी व्यवस्था को चूना लगा रहा था।
नानपारा में ब्लॉक कार्यालय के सामने ताजपुर निवासी श्यामबिहारी मौर्य की फोटो स्टेट की दुकान देखने में तो सामान्य थी लेकिन इस दुकान में रखे कंप्यूटर के द्वारा वह पूरे नानपारा तहसील की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कैप्चर किए हुए था।
तहसील के पांच विकासखंडों में इस समय 2 लाख 50 हजार 196 कार्ड धारक हैं। इनमें लाभार्थियों की संख्या 10 लाख 48 हजार है। हाल ही में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र गृहस्थी कार्डों की व्यवस्था लागू की गई।
उसी के तहत श्याम बिहारी ने पूर्ति विभाग का एनएफएसए कोड हासिल कर लिया। यह कोड सिर्फ डीएसओ या क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक के पास होता है।
इस कोड के द्वारा ग्राम पंचायत या कस्बे के कार्ड धारकों के आवेदन की जांच कर त्रुटियों को सही किया जाता है। फीडिंग को ओके कर कार्ड बनाए जाते हैं लेकिन कोड के सहारे श्यामबिहारी दिन में कंप्यूटर टायपिंग व रात में पूर्ति विभाग को चूना लगाने का खेल करता था।
पकड़ा गया तो कई विभागीय अधिकारियों के खुलेंगे राज
पूर्ति विभाग के सूत्र बता रहे हैं कि नानपारा में स्थित पूर्ति कार्यालय का दफ्तर महज औपचारिकता भर है। श्यामबिहारी के पास ही कुछ पूर्ति निरीक्षक बैठकर काम कराते थे। उसके माध्यम से ही कोटेदारों के खाद्यान्न उठान का पैसा भी जमा होता था। फर्जी कोटा निलंबन और बहाली का खेल खेला जाता था।
कहां गईं 6 फाइलें?
छापेमारी के दौरान कंप्यूटर सेंटर से 14 फाइलें बरामद हुईं थीं। यह सभी फाइलें पूर्ति विभाग से संबंधित थीं। लेकिन जो अभिलेख सीलकर पुलिस को सौंपे गए हैं, उनमें सिर्फ आठ फाइलों का हवाला है। ऐसे में 6 फाइलें कहां गईं। यह सवाल सभी को साल रहा है। हालांकि, विभागीय सूत्र बता रहे हैं कि सभी फाइलों को मर्ज कर आठ फाइलें बनाई गईं हैं। सत्यता कितनी है, जांच में पता चलेगा।
गिरफ्तारी को टीम गठित, नौ स्थानों पर की छापेमारी
नानपारा के पुलिस क्षेत्राधिकारी अजय भदौरिया ने बताया कि फर्जीवाड़ा करने वाले श्यामबिहारी की गिरफ्तारी के लिए एसएचओ प्रमोद सिंह की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम ने नौ स्थानों पर छापेमारी भी की है लेकिन उसका सुराग नहीं लग सका है