ग्राम प्रधान ने बाजार नीलामी की धनराशि सरकारी मद में जमा नहीं की थी। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने प्रधान से ढाई साल की तह बाजारी वसूली की धनराशि भू-राजस्व के रूप में वसूलने के आदेश दिए थे। पर अभी तक आदेश पर अमल नहीं हो सका है।
विकासखंड महसी के हरदी गौरा गांव निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट गुरुशरण शुक्ला ने ग्राम प्रधान त्रिलोकीनाथ के खिलाफ वर्ष 2013 में तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट किंजल सिंह से शिकायत की थी। उसने साप्ताहिक बाजार नीलामी की वसूली में बंदरबांट करने और शौचालय निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया था।
इसको लेकर गुरुशरण ने सुरेश कुमार, बाबादीन व राम मिश्रा के साथ मिलकर कलेक्ट्रेट पर अनशन भी किया था। जिलाधिकारी किंजल सिंह ने जिला पंचायत राज अधिकारी एके सिंह को मामले की जांच सौंपी थी। डीपीआरओ की जांच में खुलासा हुआ कि गांव के 17 लाभार्थियों को शौचालय धनराशि का आवंटन किया गया था। लेकिन आठ शौचालय ही बने।
प्राथमिक विद्यालय हरदी प्रथम के बगल में लगने वाली साप्ताहिक बाजार सप्ताह में सोमवार व गुरुवार को लगती है। जांच के दौरान नवंबर 2010 से अप्रैल 2013 तक 30 माह की बाजार नीलामी धनराशि का बंदरबांट करने का मामला सामने आया था। प्रतिमाह औसतन दो हजार रुपये की आय ग्रामसभा को बाजार नीलामी से होती है। इसके तहत 60 हजार का घोटाला ग्राम प्रधान ने किया है।