नेपाल से आए हाथियों के एक झुंड ने शनिवार रात जंगल से सटे चार गांवों में जमकर उत्पात मचाया। तीन आशियाने ढहा दिए गए और 140 बीघा गन्ना व धान की फसल रौंद डाली। पूरी रात गांव के लोग ढोल पीटते हुए हाका लगाते रहे।
सूचना वनाधिकारियों को दी गई लेकिन रात में वनकर्मी तक मौके पर नहीं पहुंचे। भोर में हाथियों का झुंड जंगल की ओर चला गया तब ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हाथियों के उत्पात से ग्रामीण दहशत में हैं। उन्हें सुरक्षा की चिंता सता रही है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के आसपास कई गांव आबाद हैं। शनिवार रात नेपाल से हाथियों का एक झुंड खाता कारीडोर जंगल से होते हुए निशानगाड़ा रेंज के हरिहरपुर लालपुर गांव पहुंच गया। रात करीब 11 बजे हाथी गन्ने और धान के खेत में दाखिल हुए।
उनकी चिंघाड़ सुनकर ग्रामीणों की नींद खुल गई और वह घरों से निकल पड़े। मशाल जलाकर ढोल पीटते हुए ग्रामीणों ने हाका लगाना शुरू किया। इस पर हाथी गन्ने व धान के खेत में रुक गए। हाथियों के झुंड ने गांव निवासी बिंद्रा सिंह, जोगा सिंह, केवल सिंह, गिरीश चंद्र की गन्ना और धान की आठ एकड़ फसल को रौैंद डाला।
लगभग तीन घंटे तक हाथियों ने खेतों में उत्पात मचाया। इससे 40 बीघा फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। रात दो बजे के करीब हाथियों के झुंड ने खैरटिया मझरा की ओर जाते समय बिंद्रा सिंह के फार्म हाउस के पंपिंग सेट को उखाड़ दिया।
खैरटिया गांव में हाथियों ने खेत में बने गुरुचरन, लखवीर और जसपाल सिंह के आशियानों को रौंद डाला। यहां भी लोगों ने ढोल पीटते हुए मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की। इस पर हाथियों का झुंड खेतों में घुस गया और गन्ना व धान की फसल को तहस-नहस किया।
भोर में तक हाथी खेत में जमा रहे। इस दौरान गुरुचरन, लखवीर, जसपाल, कमलेंद्र, गुरमीत और गुरुनेल की 100 बीघा धान व गन्ना की फसल को रौंद डाला। वहां से जाते समय हाथियों ने सेती फार्म और रमपुरवा के निकट भी खेतों को नुकसान पहुंचाया।