बहराइच। 14 साल पहले डाल पर कब्जे को लेकर युवक की हत्या करने वाले आठ हत्यारों को अपर सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट नरेंद्र कुमार ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
अलग-अलग मामलों में 15,500 रुपये अर्थदंड भी लगाया है। वारदात वर्ष 2001 में गिलौला के खुरथुआ गांव में हुई थी, जिसमें मृतक के परिवार के चार लोग घायल भी हुए थे।
श्रावस्ती जिले के गिलौला थाना क्षेत्र अंतर्गत खुरथुआ गांव निवासी अदालत प्रसाद ने 30 जुलाई 2001 को थाने पर तहरीर देकर कहा था कि रात में आंधी के दौरान गाटा संख्या 30/560 में लगे पेड़ की डाल गिर गई थी।
इस डाल पर गांव निवासी रामराज, साधुसरन, बड़ेबाबू, नानबाबू, कुन्नू व वैनी निवासी नत्थूराम, बदलू, उमानाथ, बृजनंदन, रामरंग, दिनेश आदि ने कब्जा बताते हुए घर ले जाने का प्रयास किया। मौके पर पहुंचे अदालत प्रसाद ने डाल पर अपना हक जताते हुए रोका तो सभी हमलावर हो गए।
अदालत की चीख सुनकर उनके भाई राजकुमार, योगेंद्र प्रसाद, अजय और अजय की मां बचाने दौड़ी तो उन पर भी सभी ने हमला कर फायरिंग कर दी थी। गोली लगने से राजकुमार गंभीर रूप से घायल हो गया था।
थाने पर शिकायत के लिए जाते समय उसने दम तोड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। मुकदमे के दौरान साधुसरन की मौत हो गई थी, जबकि नानबाबू को नाबालिग घोषित कर किशोर न्यायालय भेज दिया गया था।
इसी मामले में शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट नरेंद्र कुमार के न्यायालय पर बहस हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संत प्रताप सिंह और बचाव पक्ष के वकील ने बहस की।
बहस के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट ने सजा सुनाते हुए राजाराम उर्फ भुल्लू, बड़ेबाबू उर्फ रामकुमार, धन्नू उर्फ रामतेज, नत्थूराम तिवारी, बदलूराम, उमानाथ, बृजनंदन और दिनेश तिवारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए अलग-अलग मामलों में 15500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर सभी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
श्रावस्ती सीजेएम कोर्ट से स्थानांतरित हुआ था मुकदमा
गौरतलब हो कि मुकदमा गिलौला थाने में दर्ज होकर सीजेएम न्यायालय श्रावस्ती में चल रहा था। वर्ष 2004 में 19 जनवरी को सीजेएम कोर्ट से पत्रावली बहराइच न्यायालय स्थानांतरित कर दी गई क्योंकि इसमें अधिकतर आरोपी बहराइच जिले के शामिल थे।